भारतीय पुलिस स्मृति दिवस पर देश के वीर शहीद पुलिसकर्मियों को नमन

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Updated on 21 Oct, 2016 at 1:22 pm

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21 अक्टूबर आजाद भारत के इतिहास का वो दिन है, जब लद्दाख सीमा पर चीन की सेना ने भारतीय पुलिस के 21 जवानों पर घात लगाकर हमला किया।

यह घटना है वर्ष 1959 की, जब चीनी सेना की घुसपैठ की गतिविधियों को देखते हुए भारत-तिब्बत सीमा पर CRPF के जवानों के साथ-साथ अन्य बलों के जवानों को सीमा की रखवाली के लिए तैनात किया गया था।

21 अक्टूबर 1959 को CRPF के सब-इंस्पेक्टर करम सिंह के नेतृत्व में 21 जवान जब सीमा पर गश्ती लगा रहे थे, उस वक्त चीनी सेना ने अचानक से उन पर हमला कर दिया।

अपने दल का मोर्चा संभाले सब-इंस्पेक्टर करम सिंह और उनके साथियों ने पूरी बहादुरी के साथ चीनी सैनिकों से लोहा लिया। इसमें 10 पुलिसकर्मी देश की हिफाजत के लिए लड़ते हुए शहीद हो गए। साथ ही चीनियों ने 11  पुलिसकर्मियों को बंदी बना लिया।

इसी शहादत की याद में हर साल 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है। साल 1960 में इस दिन को आधिकारिक दर्जा दिया गया और साल 2012 से इसे देश भर में  मनाए जाने लगा।

इन पुलिसकर्मियों की शहादत को याद करते हुए देशभर में इन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

चीनी हमले से लेकर आज तक पिछले 58 वर्षों में 35 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी देश की सुरक्षा और समाज की सेवा में अपने प्राणों की आहुति दे चुके हैं।

पुलिस उस दीवार की तरह है, जिसके हवाले देश की आतंरिक सुरक्षा है। आतंकी या नक्सली हमला, सांप्रदायिक दंगे, अतिक्रमण, लूटपाट, जंगल व खनन माफियाओं पर लगाम कसना, हिंसक भीड़ से जान-माल की हिफाजत, घायलों को अस्पताल पहुंचाने सहित पुलिस की अनंत जिम्मेदारियां हैं।

हमला चाहे संसद, अक्षरधाम मंदिर, मायानगरी मुंबई, देश का दिल दिल्ली या कश्मीर पर हो, सबसे पहले पुलिसकर्मी हेमंत करकरे, तुकाराम ओमले, मोहनचंद्र शर्मा, सरदार बलजीत सिंह, जिया उल हक, संतोष यादव, मुकुल द्विवेदी और पवन कुमार जैसे जाबांज़ आते हैं।


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