ईरान में पीएम मोदी, जानिए क्यों टिकी है चाबहार समझौते पर नजर ?

author image
Updated on 10 Jul, 2016 at 9:58 am

Advertisement

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ईरान की राजधानी तेहरान पहुंच चुके हैं। वहां उनका जमकर स्वागत किया गया और गार्ड ऑफ ऑनर के दौरान जन-गण-मन गूंजता रहा। इस दौरान ईरान के राष्ट्रपति रोहानी भी मौजूद थे।

प्रधानमंत्री मोदी की ईरान यात्रा के दौरान चाबहार समझौता होने की उम्मीद है। भारत और ईरान के बीच यह समझौता पाकिस्तान और चीन की रणनीति को करारा जवाब होगा।

पाकिस्तान के बलुचिस्तान में स्थित ग्वादर पोर्ट में चीन की उपस्थिति को चुनौती देने के उद्देश्य से ईरान का चाबहार पोर्ट भारत के लिए अहम माना जा रहा है।

चाबहार पोर्ट के तैयार हो जाने के बाद भारत और ईरान सीधे व्यापार कर सकेंगे। इस पोर्ट की बदौलत भारतीय और ईरानी जहाजों को पाकिस्तान के रूट से नहीं जाना पड़ेगा। इस समझौते में अफगानिस्तान के अहम रोल की भी बात कही गई है।


Advertisement

ईरान की यात्रा पर निकलने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर जानकारी दी थी कि उन्हें चाबहार पोर्ट समझौता होने का भरोसा है। इससे दोनों देशों के बाच कारोबार करना आसान हो जाएगा।

जापान ने भी दिखाई है दिलचस्पी

चाबहार परियोजना पर जापान भी अपनी दिलचस्पी जाहिर कर चुका है। ईरान में जापान के राजदूत पिछले साल ओमान की खाड़ी स्थित चाबहार पोर्ट के दौरे पर गए थे और तब उन्होंने इस परियोजना को वैश्विक व्यापार केन्द्र बनाने पर चर्चा की थी।

माना जा रहा है कि चाबहार में जापान की इच्छा एक इन्डस्ट्रियल कॉम्पलेक्स बनाने की है। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि इस साल जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे भी ईरान की यात्रा कर सकते हैं। यह किसी जापानी प्रधानमंत्री की ईरान यात्रा 38 साल बाद होगी।

विशेषज्ञ मानते हैं कि चाबहार के एक प्रमुख वैश्विक शिपिंग हब के रूप में उभरने की क्षमता ग्वादर से कहीं अधिक है।


Advertisement

आपके विचार


  • Advertisement