खादी कैलेंडर से गांधी हुए गायब, अब पीएम मोदी के हाथ में चरखा

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Updated on 13 Jan, 2017 at 3:07 pm

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खादी ग्राम उद्योग हर साल अपना कैलेंडर जारी करता है, जिसमें हर बार राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की तस्वीर छपती रही है।

लेकिन इस साल 2017 के कैलेंडर में महात्मा गांधी की तस्वीर नदारद है। उनके स्थान पर पीएम मोदी की तस्वीर को जगह दी गई है।

खादी ग्राम उद्योग के पुराने कैलेंडरों का इतिहास गवाह है कि अब तक इसके कैलेंडर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की चरखा चलाते और सूत कातते हुए तस्वीर रहती थी। लेकिन 2017 के कैलेंडर में चरखा चलाते हुए पीएम मोदी को दिखाया गया है, जिसके बाद यह चर्चा का विषय बना हुआ है।

खादी भारत के गौरवशाली इतिहास का अभिन्न अंग रहा है। आजादी की जंग लड़ रहे भारतीयों ने विदेशी कपड़ों का त्याग कर, खादी से बने कपड़ों को अपनाकर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ इंकलाब और आजादी की मुहिम छेड़ी थी। देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने ‘खादी अपनाओ’ का नारा दिया था।

गांधी की तस्वीर हटाए जाने के मसले पर आयोग के चेयरमैन विनय कुमार सक्सेना का कहना हैः



“पूरा खादी उद्योग ही गांधी जी के दर्शन, विचारों और आदर्शों पर आधारित है। वह खादी ग्राम उद्योग की आत्मा जैसे हैं। ऐसे में उन्हें नजरअंदाज किए जाने का कोई सवाल ही नहीं उठता।”

वहीं, पीएम मोदी की तस्वीर को जगह देने के पीछे उनका तर्क हैः

“पीएम नरेंद्र मोदी भी लंबे समय से खादी पहनते रहे हैं। खादी में उन्होंने अपना स्टाइल विकसित करते हुए बड़ी संख्या में भारतीयों समेत विदेशियों को भी इसकी ओर आकर्षित किया है। पीएम मोदी खादी के सबसे बड़े ब्रैंड एंबेसडर हैं। उनके ‘मेक इन इंडिया’ विजन के तहत खादी ग्रामोद्योग गावों को आत्मनिर्भर बनाने और स्किल डिवेलपमेंट के जरिए युवाओं को रोजगार देने के प्रयास में जुटा है। खादी को बुनने के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है। नए प्रयोग हो रहे हैं और मार्केटिंग को भी बेहतर करने पर जोर दिया जा रहा है।”

इस बीच, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के परपौत्र तुषार गांधी ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि पहले चरखा गरीब लोगों की कमाई का स्रोत और  उत्पादन का जरिया हुआ करता था, लेकिन अब महज तस्वीर खिंचवाने का साधन बन कर रह गया है।


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