इन 5 लोगों के प्रयासों ने बदल दी आम लोगों की ज़िंदगी

Updated on 9 Feb, 2018 at 2:47 pm

Advertisement

जब भी हम ऐसे लोगों की बात करते हैं जिनके प्रयासों ने दूसरों की ज़िंदगी बदल दी, तो हमारे ज़ेहन में ऐसे लोगों की छवि उभरती है जिनके पास नाम, दौलत और शोहरत है। हालांकि, दुनिया में बहुत से ऐसे लोग भी हैं जो बिना नाम कमाए सच्चे मन से लोगों की सेवा कर रहे हैं और उनकी ज़िंदगी में सकारात्मक बदलाव के प्रयास कर रहे हैं। ये लोग हमारी और आपकी तरह ही हैं। बस फर्क है तो क्षमता, हिम्मत, हौसले और मानव कल्याण की भावना का है, जिसकी बदलौत उन्होंने हज़ारों लोगों की मदद की है।

सूर्य प्रकाश राय

प्रयोग (प्रोफेशनल्स अलांयस फॉर यूथ ग्रोथ) नामक संस्था के ज़रिए सूर्य प्रकाश गांव के बच्चों को पढ़ाने का काम कर रहे हैं। बिहार के गोपालगंज जिले के एक छोटे से गांव से शुरू होने वाला प्रयोग आज 12 गांव के करीब 400 बच्चों को शिक्षित करने का काम कर रहा है। सूर्य प्रकाश ने सिर्फ़ बच्चों को पढ़ाने का काम ही नहीं किया, बल्कि गांव में लाइब्रेरी भी बनवाई जिसका फायदा बच्चों को हुआ। दरअसल, सूर्य प्रकाश ने देखा कि गांव की सबसे बड़ी समस्या शिक्षा और बिजली की अभाव है। इतना ही नहीं, बच्चों के साथ ही पैरेंट्स में भी शिक्षा के प्रति कोई दिलचस्पी नहीं थी, तो उन्होंने सबसे पहले लोगों की सोच को बदला और आज सैकड़ों बच्चों को इसका लाभ मिल रहा है।

विकास पालकोट

शिक्षा के प्रति विकास का विचार थोड़ा अलग है। वह किताबी शिक्षा के अलावा खेल को भी ज़रूरी मानते हैं। विकास ने जस्ट फॉर किड्स (JFK) नामक संस्था बनाई है, जिसका उद्येश्य है कि सभी खेलें। दरअसल, इस संस्था का उद्येश्य देश के छोटे बजट वाले स्कूलों में बच्चों को फुटबॉल के ज़रिए जीवन कौशल सिखाना है। विकास टीचर्स और पैरेंट्स को इस बात के लिए प्रेरित करते हैं कि खेल को भी बच्चों की शिक्षा का अहम हिस्सा बनाया जाए। JFK पुणे, मुंबई और हैदराबाद में करीब 1200 बच्चों की खेल की ज़रूरतों को पूरा करता है। यह संस्था फुटबॉल टीम बनाती है, उन्हें कोचिंग देती है और फिर 2 महीने की फुटबॉल लीग का आयोजन करती है। यह पार्टनर क्लब के साथ साझेदारी भी करती है।

ऋचा सिंह


Advertisement

आईआईटी गुवाहाटी की से पढ़ने वाली ऋचा ने www.yourdost.com नामक वेबसाइट बनाकर लोगों को एक प्लेटफॉर्म दिया जहां वो अपनी इमोशनल प्रॉब्लम्स शेयर कर सकते हैं और उन्हें उसका समाधान भी मिलेगा. हाल ही में हुए अध्ययन के मुताबिक भारत में डिप्रेशन का शिकार लोगों की संख्या काफ़ी ज़्यादा है। विश्व सवास्थ्य संगठन के अध्ययन के मुताबिक, भारत की करीब 36 प्रतिशत जनसंख्य डिप्रेशन, पैनिक अटैक या एंग्जाइटी का शिकार है। ऋचा की वेबसाइट पर लोग बिना अपनी पहचान ज़ाहिर किए अपने समस्या डिसक्स कर सकते हैं। इस वेबसाइट पर पहले ही महीने में करीब 300 लोगों ने साइन इन किया।

सुरेश अडिगा

महाराष्ट्र में हर साल किसान आत्महत्या करते हैं। खासतौर पर विदर्भ में। अमेरिका से इंजीनियरिंग करने वाले सुरेश ने इस समस्या के समाधान के लिए पैसे जुटाने शुरू किए। उन्हें देश और विदेश से कई दान देने वाले मिले। इन पैसों से वह पीड़ित और उनके परिवार की मदद करते हैं। वे विदर्भ के पीड़ित परिवारों की पुनर्वास में भी मदद करते हैं।

अरुणाचलम मुरुगनाथम

मुरुगनाथम को भारतीय सुपरहीरो कहा जाता है। उन्होंने महिलाओं में माहवारी के टैबू को तोड़ा। गरीब परिवार में जन्में मुरुगनाथम ने बहुत कम उम्र में ही पिता को खो दिया। उन्होंने जिंदगी में बहुत सी मुश्किलों का सामना किया। भारत में सैनेटरी नैकपिन अभियान की शुरुआत इन्होंने ही की थी, जिसका मकसद जागरूकता फैलाना था। उनकी मुहीम की बदौलत ही अब ग्रामिण महिलाएं भी सैनेटरी नैपकिन खरीद रही हैं। वर्ष 2014 में उनका नाम टाइम मैगज़ीन के सबसे प्रभावशाली लोगों में शामिल हुआ था और अब उनके जीवन पर ही पैडमैन फिल्म बनी है।

Advertisement

आपके विचार


  • Advertisement