‘तीन तलाक’ के बाद साथ रहना चाहते हैं पति-पत्नी लेकिन पड़ोसियों को है आपत्ति

Updated on 8 Sep, 2017 at 1:32 pm

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 परम्पराओं के प्रति गहरी आस्था कभी-कभी अंध-आस्था बन जाती है।

‘तीन तलाक’ पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुर्ख़ियों में रही। कोर्ट ने ‘तीन तलाक’ को असंवैधानिक करार दिया है, जिसे महिलाओं के हक में एक बड़ा फ़ैसला माना जा रहा है। लेकिन गुजरात के अहमदाबाद की एक घटना ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या वाकई मुस्लिम समाज परिवर्तन के लिए तैयार है!  इस घटना ने मुस्लिम समाज का ऐसा रूप दिखाया है, जिसे क़ानून से कोई फर्क नहीं पड़ता।

दरअसल, एक शख्स ने शराब के नशे में अपनी बीवी को तलाक दे दिया और घर से निकल गया। जब नशा उतरा तो उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने अपनी बीवी से माफी मांगी और घर लौट गया। लेकिन पड़ोसियों ने तलाकशुदा दंपत्ति के साथ रहने पर आपत्ति कर दी। पड़ोसियों ने उनका सामाजिक बहिष्कार तक कर दिया।

यह साफ है कि ‘तीन तलाक’ असंवैधानिक है। ऐसे में पति-पत्नी के बीच सहमति होने पर उन्हें समाज द्वारा रोका जाना अपराध है।

इस संबंध में महिला का कहना हैः

“हम साथ रहना चाहते हैं लेकिन पड़ोसियों ने नाक में दम कर रखा है। मुझे अपने मां-बाप के घर लौट जाना चाहिए। मेरे ऊपर इस रिश्ते को खत्म करने का काफी दबाव डाला जा रहा है।”


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इस बारे में बात करते हुए एक्टिविस्ट नूरजहां दीवान कहती हैंः

“इस दंपति के आपसी झगड़े को सुलझा लेने के बावजूद पड़ोसियों का व्यवहार चौंकाने वाला है। पड़ोस के लोगों ने उनका सामजिक बहिष्कार कर दिया है। इनका उनके 6 साल के बेटे पर बुरा असर पड़ सकता है। ये सब तब हो रहा है, जब देश की सर्वोच्च न्यायलय ने इसे असंवैधानिक करार दिया है।”

जब ‘तीन तलाक’ गैरकानूनी घोषित किया जा चुका है, ऐसे में मुस्लिम समाज को आगे आकर इसे स्वीकार करना चाहिए।

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