प्रदूषण से हुईं भारत में सबसे ज्यादा मौतें, एक साल में मारे गए 25 लाख लोग !

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Updated on 20 Oct, 2017 at 9:39 pm

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हमारे देश में प्रदूषण की समस्या को लोग हल्के में लेते हैं, लेकिन जो सचाई सामने आई है, वह भयानक है। भारत में जितने लोग मलेरिया, एड्स और टीबी समेत अन्य बीमारियों से नहीं मरते, उससे कहीं ज्यादा लोग प्रदूषण की चपेट में आकर अपनी जान गंवा देते हैं। प्रदूषण पर आई एक ताजा रिपोर्ट के आंकड़े चिंतित करने वाले हैं।

मेडिकल जर्नल द लान्सेट के एक शोध में सामने आया है कि 2015 में दुनिया भर में वायु, जल और दूसरे तरह के प्रदूषणों से लगभग 90 लाख लोगों ने अपने जाने गंवाई, जिनमें से 25 लाख मौतें अकेले भारत में हुई। ये दुनिया के किसी भी देश के मुकाबले सबसे ज्यादा है। मृतकों के ये आंकड़े एड्स, मलेरिया और ट्यूबरकुलोसिस जैसी घातक बीमारियों से मरने वाले लोगों से तीन गुना अधिक है।

शोध में बताया गया है कि वायु प्रदूषण इसका सबसे बड़ा कारक है, जिसकी वजह से साल 2015 में दुनिया में 65 लाख लोगों की मौत हुई, जबकि जल प्रदूषण से 18 लाख मौत और कार्यस्थल से जुड़े प्रदूषण ने 8 लाख लोगों की जान ली।

2015 में प्रदूषण की वजह से सबसे अधिक लोगों की मौत भारत में हुई, जहां 25 लाख लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। चीन में प्रदूषण के कहर ने 18 लाख लोगों को मौत की चपेट में लिया।

इसके अलावा बांग्लादेश, पाकिस्तान, नॉर्थ कोरिया, साउथ सूडान जैसे देशों में कुल अकाल मौतों का पांचवां हिस्सा प्रदूषण की वजह से होता है।

शोधकर्ताओं में दिल्ली में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली और अमेरिका के इकाह्न स्कूल ऑफ मेडिसिन के विशेषज्ञ शामिल थे।

उधर दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी (DPCC) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली-NCR में पटाखों की बिक्री पर रोक लगने के बावजूद भी दिवाली की रात हुई आतिशबाजी से दिल्ली के अलग-अलग स्थानों पर हवा में प्रदूषण का स्तर अपने सामान्य स्तर से कहीं अधिक पाया गया।

हालांकि, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) का मानना है कि पिछले साल की तुलना में इस साल दिल्ली की हवा में प्रदूषण का स्तर कम रहा।

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