इस ‘ट्रैफिक सिपाही’ की मदद को बढ़े हाथ, बेटी को सड़क हादसे में खोने के बाद संभाली थी कमान

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Updated on 3 Dec, 2016 at 8:29 pm

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एक मां ने सड़क दुर्घटना में अपनी 17 साल की बेटी को खो दी। यहीं उस मां ने प्रण लिया कि वह अपनी बच्ची को तो नहीं बचा सकी, लेकिन अब दूसरों के बच्चों को सड़क दुर्घटना का शिकार नहीं होने देंगी।

लेकिन आज वह मां कैंसर से जिंदगी की जंग लड़ रही हैं।

सड़क हादसे में बेटी को खोने के बाद दूसरों की मदद के लिए एनएच-24 पर बीते सात सालों से लगातार नि:स्वार्थ भाव से ट्रैफिक कंट्रोल करने वाली डॉरिस फ्रांसिस कैंसर से पीड़ित हैं।


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57 साल की इस बहादुर ‘सिपाही’ के लिए कई लोगों ने अपने मदद के हाथ आगे बढ़ाए हैं। डॉरिस के पति विक्टर के मुताबिक, ईस्ट दिल्ली के पुलिसकर्मियों और आम जनता ने मिलकर करीब ढ़ाई लाख रुपए जमा किए हैं। वहीं, डॉरिस को प्रधानमंत्री राहत कोष से तीन लाख रुपए की सहायता राशि मिलेगी। खबर ये भी है कि पीएमओ के अंडर सेक्रेटरी (फंड) पीके बाली ने अपना व्यक्तिगत नंबर देकर भविष्य में हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया है।

अच्छी खबर ये है कि मैक्स अस्पताल ने कैंसर से जूझ रही डॉरिस का इलाज मुफ्त करने का जिम्मा उठाया है।



मैक्स अस्पताल के ओंकोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. अरुण गोयल ने बतायाः

“डोरिस फ्रांसिस के स्वास्थ्य में काफी सुधार है। उनके स्वास्थ्य में सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं। वह जल्दी ही पूरी तरह स्वस्थ हो जाएंगी। शुक्रवार के बाद उनकी कुछ और रिपोर्ट आएंगी। उसके आधार पर दवाएं शुरू की जा सकेंगी। फिलहाल 15 दिनों तक उन्हें अस्पताल में रखना बहुत जरूरी है।”

सुबह से लेकर शाम तक ट्रैफिक का संचालन करती डोरिस के कैंसर के बारे में डॉक्टरों की मानें, तो उनके कैंसर की वजह प्रदूषण नहीं है पर उसको बढ़ाने में एक कारक ज़रूर है।

साल 2009 में NH 24 पर डॉरिस की बेटी को तेज रफ्तार से आती एक कार ने टक्कर मार दी थी, जिसमें उसकी मौत हो गई। बेटी की मौत के बाद सराहनीय कदम उठाते हुए वह एनएच 24 पर ट्रैफिक का संचालन करने लगीं।

dorris

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