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11 तरह के सहयात्री जो आपको ट्रेन यात्रा के दौरान मिलेंगे

Updated on 5 April, 2017 at 7:38 pm By

ट्रेन की यात्रा का मतलब है, हंसी मजाक, कविता-कहानी, दोस्ती यारी और ढेर सारी यादें। जी हां, हम एक ऐसे देश में रहते हैं, जहां एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए ट्रेन सबसे तेज और सस्ता साधन है। कभी-कभी तो दूर-दराज के क्षेत्रों में जाने के लिए ट्रेन ही एकमात्र वाहन होता है और इसका कोई विकल्प नहीं होता। सच्चाई यह भी है कि हममें से अधिकतर लोग नियमित तौर पर हवाई जहाज का इस्तेमाल नहीं कर सकते। इसलिए, यात्रा अकेले करना हो या परिवार के साथ। ट्रेन सबसे बेहतर माध्यम है। यह इस देश में ही होता है कि यात्रा के दौरान ट्रेन को हम घर बना लेते हैं।


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अपनी प्रत्येक ट्रेन यात्रा में हमारी मुलाकात कुछ विशिष्ट लोगों के साथ होती है, जो हम पर असर छोड़ जाते हैं। चाहें हम उनसे बात करें या न करें। हम यहां ऐसे लोगों के बारे में ही बात करने जा रहे हैं।

1. पीछा करने वाला

इस तरह का सहयात्री हमेशा आप पर नजर बनाए रखता है। यह अलग बात है कि पूरी यात्रा के दौरान वह आपसे कुछ बात नहीं करता। कभी-कभी तो आपको पता भी नहीं चलता कि वह आपको घूर रहा है। आपको अपनी किसी न किसी यात्रा में ऐसे किसी व्यक्ति से मुलाकात जरूर होगी।

2. भोजनभट्ट

हम भारतीय भोजन के बड़े ही शौकीन होते हैं। वैसे हममें से कुछ लोग खाने के लिए ही जीते हैं। लगभग सभी यात्राओं में आपको इस तरह का कोई न कोई सहयात्री जरूर मिल जाता है जो ढेर सारा खाना लेकर चलता है। इन लोगों के पास अपने घर में बना हुआ खाना तो होता ही है, ये स्नैक्स का थैला भी लेकर चलते हैं। इन सहयात्रियों को यह भी पता होता है कि कौन से स्टेशन पर क्या खाने को मिलेगा। कभी-कभी तो रेल कैन्टीन वाले भी इनके मित्र निकलते हैं।

3. बकबक लाल

ऐसे सहयात्री रेड़ियो जॉकी की तरह होते हैं। एक बार बोलना शुरू करते हैं तो फिर रुकने का नाम नहीं लेते। आप इन्हें नजरअंदाज भी करें तो भी इनकी बकबकी कम नहीं होती। इस तरह के लोगों को श्रोताओं की जरूरत नहीं पड़ती। वे दीवाल के साथ भी बात कर सकते हैं। बस आप मन ही मन सोचते हैं। अमां, चुप भी हो जाओ यार।

4. पढ़ाकू

इन्हें देखकर ही पहचान सकते हैं। दरअसल इन्हें पहचान लेना सबसे आसान काम है। ये लोग अपनी किताब हाथ में ही लेकर चलते हैं। ऐसे सहयात्रियों की दोस्ती किताबों से ही होती है। साथ यात्रा करने वालों के साथ तो इनकी कतई नहीं जमती। ऐसे लोग अापको हमेशा पढ़ाई में मशगूल मिलेंगे। चाहे विन्डो सीट पर, या फिर दरवाजे के पास खड़े होकर या अपर बर्थ पर लेटकर। इन्हें बस पढ़ाई से मतलब होता है। हां, बीच-बीच में यह जरूर पूछ लेते हैं। अरे भैय्या, कौन सा स्टेशन आया।

5. कुम्भकर्ण

अगर सोने के लिए पैसे मिलने लगे तो इस तरह की नस्ल के यात्री करोड़पति होते। ऐसे सहयात्री को कहीं भी नीन्द आ सकती है। दरअसल, वह कहीं भी सो सकते हैं। अरे जनाब, हम कुछ ऐसे लोगों को जानते हैं, जिन्हें ट्रेन के डिब्बों में बेहतर नीन्द आती है। ऐसे लोगों के लिए ट्रेन की यात्रा तो एक ट्रीट की तरह है। समझे की नहीं।

6. संगीतप्रेमी



आजकल लोग एक-दूसरे को हैलो नहीं कहते। इसकी वजह यह है कि लोगों को अब सुनाई कम देता है। अरे साहब, वे अपने कानों में इयरफोन जो ठूंसे रहते हैं। ऐसे लोगों को संगीतप्रेमी कहते हैं। इस तरह के अधिकतर लोग हमें ट्रेनयात्रा के दौरान भी मिल जाते हैं। ऐसे लोगों को यह फर्क नहीं पड़ता कि उनके आसपास क्या चल रहा है। वह तो बस अपने संगीत में खोए रहते हैं। अगर आप ऐसे लोगों को अपने साथ जोड़ना चाहते हैं तो बच के रहिए। संगीत से उन्हें अलग करने के लिए लड़ाई हो सकती है।

7. एनसाइक्लोपीडिया

कुछ लोग इतनी सारी चीजें याद रखते हैं कि उनके नाम पर मेमोरी कार्ड और हार्ड ड्राइव के नाम रखे जा सकते हैं। उनके पास ज्ञान का भंडार होता है और कहानियां इतनी होती हैं कि पूरी यात्रा बीत जाए, फिर भी खत्म नहीं होंगी। ऐसे लोग किसी भी मुद्दे पर बड़ी बेबाकी से अपनी राय रखते हैं। यकीन न हो तो आजमा कर देख लीजिए।

8. प्रकृतिप्रेमी

ऐसे लोग जैसे कैमरे के साथ ही जन्म लेते हैं। इनकी आंखें शायद ही ट्रेन के कैमरें में होती हैं, पर हां हाथ व्यस्त होते हैं। जी, कैमरे में। ये ट्रेन के बाहर का दृश्य छोड़ नहीं सकते। और हां, अगर इनके पास डीएसएलआर हुआ तो फिर पूरे ट्रेन को पता चल जाता है कि बन्दे के पास कुछ तो है।

9. गुरूदेव

इस तरह के सहयात्रियों को लगता है कि पूरी दुनिया का भार जैसे उनके कन्धे पर ही है। वह सलाह देते हैं, ज्ञान देते हैं और कभी-कभी आपको पुचकारते भी हैं। एक गुरू की तरह तो कभी एक मां की तरह। खासकर बच्चों के प्रति तो उनका व्यवहार मातृत्व से भरा होता है। वे हमेशा कहते हैं, खिड़की से बाहर हाथ मत निकालो। अरे, कम्पार्टमेन्ट में दौड़ो मत। गिर जाओगे।

10. प्रेमी जोड़े

ये युगल होते हैं। नव-विवाहित और हनीमून पर जाने वाले। रिटायर्ड जोड़े। ऐसे जोड़े हमेशा पास-पास होते हैं। हममें से बहुत लोगों को अपनी यात्रा के दौरान इस तरह के सहयात्रियों से पाला पड़ा होगा। यकीन मानिए, गंतव्य चाहे कितना भी दूर क्यों न हो, इनको देखते-देखते यात्रा मजे से कट सकती है।

11. दूर के रिश्तेदार या पुराना दोस्त

कभी-कभी ऐसा होता है कि एक ही डिब्बे में हमें दूर के रिश्तेदार या पुराने मित्र मिल जाते हैं। बस फिर क्या है। आपको कोई दूर के रिश्तेदार मिल गए तो यात्रा खराब। वे परिवार की ऐतिहासिक गाथा शुरू कर देते हैं और आपको कोफ्त होने लगती है। यह अलग बात है कि अगर कोई पुराना मनचाहा मित्र मिल जाए तो फिर बल्ले-बल्ले। बीती हुई सुनहरी यादों पर बात करते हुए आप समय बिता सकते हैं।


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अगली बार जब ट्रेन से कहीं यात्रा पर जाएं तो अपने आसपास नजर रखिए। हो सकता है कि अापको किसी अलग तरह का सहयात्री मिले, जिसका कि जिक्र इस लेख में नहीं हुआ है। हम उम्मीद करते हैं कि आपकी यात्रा मंगलमय होगी। हमारी तरफ से ढेर सारी शुभकामनाएं।

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