इस इतिहासकार ने की कुख्यात जनरल डायर से सेना प्रमुख बिपिन रावत की तुलना

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Updated on 6 Jun, 2017 at 5:45 pm

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बंगाल के प्रसिद्ध लेखक एवं इतिहासकार पार्थ चटर्जी ने सेना प्रमुख बिपिन रावत को लेकर विवादित लेख लिखा है, जिसने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है।

चटर्जी ने वेबसाइट पोर्टल ‘द वायर’ के लिए 2 जून को लिखे गए अपने लेख में सेना प्रमुख बिपिन रावत की तुलना ब्रिटिश जनरल डायर से की है। उन्होंने कहा कि इस वक्त कश्मीर ‘जनरल डायर मोमेंट’ से गुजर रहा है।

ये कहकर उन्होंने मेजर गोगोई को मिले सेना प्रमुख के समर्थन पर निशाना साधा है। मेजर गोगोई ने सेना की जीप पर एक पत्थरबाज कश्मीरी युवक को बतौर मानव ढाल बनाकर घुमाया था, जिसका समर्थन करते हुए सेना प्रमुख ने कहा था कि उन्होंने जो किया वो परिस्थिति के अनुकूल था।

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इस पर पार्थ चटर्जी ने अपना तर्क देते हुए लिखा कि 1919 में जलियांवाला बाग हत्याकांड के पीछे जो ब्रिटिश सेना के तर्क थे, उनमें और सेना प्रमुख के तर्कों में समानताएं हैं।



चटर्जी ने लिखा कि जनरल डायर ने जलियांवाला बाग में जिस तरह से भारतीयों का नरसंहार किया, वो उसे अपनी ड्यूटी मानता था। उसे लगता था कि वह एक बड़ी तादाद में विद्रोही आबादी का सामना कर रहा है।

चटर्जी को अपने इस लेख के कारण तीखी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। सेना के रिटायर्ड जवानों ने इसकी कड़े शब्दों में निंदा की है। कइयों ने चटर्जी के खिलाफ कानूनी कारवाई करने की मांग की है, तो कई ने कहा कि अगर भारत में ही ऐसे लोग हैं तो पाकिस्तान की जरूरत ही क्या है।

उधर पार्थ चटर्जी अपने विचारों पर अड़े हैं। उनका कहना है कि उन्होंने जो कहना था वह कह चुके हैं। वह अपने तर्क को जितने स्पष्ट तरीके से बता सकते थे, उन्होंने वही लिखा है।


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