जानिए मंदिर में क्यों लगाई जाती है परिक्रमा और ये कितनी बार करनी चाहिए

11:38 pm 4 Nov, 2018

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मंदिर तो आप सब जाते ही होंगे और वहां जाकर पूजा-अर्चना करने के बाद मंदिर का चक्कर भी लगाते होंगे। मंदिर में परिक्रमा लगभग सभी करते हैं, लेकिन परिक्रमा क्यों की जाती है इसके बारे में शायद ही किसी को पता है। बस घर के बड़े ऐसा करते थे, इसलिए हम उसे फॉलो कर रहे हैं, मगर इसका कारण नहीं पता। चलिए आज हम आपको बताते हैं आखिर मंदिर में परिक्रमा क्यों की जाती है?

 

 

मंदिर की परिक्रमा लगाना हिंदू धर्म में शुभ माना जाता है। इसके पीछे मान्यता है भगवान गणेश जी ने अपने भाई कार्तिक के साथ पूरी सृष्टि का चक्कर लगाने की शर्त लगाई थी, लेकिन गणेश जी ने सिर्फ़ अपने माता-पिता के ही तीन चक्कर लगाए और वो जीत गए, क्योंकि पूरी सृष्टि माता पिता के चरणों में ही हैं।

 

गणेश जी की तर्ज पर ही लोग भगवान को अपना माता-पिता मानकर इनकी परिक्रमा लगाते हैं और माना जाता है ऐसा करने से भगवान माता-पिता के रूप में परिक्रमा करने वाले व्यक्ति के साथ सदैव रहते हैं।


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परिक्रमा लगाने के कई फ़ायदे भी है। ऐसा माना जाता है परिक्रमा लगाने से भगवान की कृपा बनी रहती है और इससे धन संबंधी परेशानी नहीं आती। ऐसा करने वाले के पास कभी भी पैसों की कमी नहीं होती है। मान्यता के अनुसार, जो भी इंसान परिक्रमा लगाता है, उसके घर से नकारात्मक ऊर्जा चली जाती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है, जिससे घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है।

 

 

उधर परिक्रमा घड़ी की सुई की दिशा में करनी चाहिए। यह भी माना जाता है परिक्रमा 8 से 9 बार करनी चाहिए। इसलिए अब से जब भी आप मंदिर जाएं भगवान की परिक्रमा ज़रूर करें।

 

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