अब पाकिस्तान को भी लगता है कि हाफिज सईद आतंकवादी है, लेकिन क्या है हृदय परिवर्तन की वजह ?

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Updated on 18 Feb, 2017 at 9:07 pm

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पाकिस्तान ने पहली बार मुंबई हमलों के मुख्य साजिशकर्ता और जमात-उद-दावा के सरगना हाफिज सईद को आतंकवादी माना है। पाकिस्तान में पंजाब प्रान्त की सरकार ने सईद को आतंकवाद निरोधक कानून के दायरे में लाकर उसके आतंकवाद से संबंध होने को मौन स्वीकृति दे दी है। उसका नाम एग्जिट कंट्रोल सूची में भी रखा गया है। एग्जिट कंट्रोल सूची हाफिज सईद के चार सहयोगियों अब्दुल्ला ओबैद, जफर इकबाल, अब्दुर रहमान आबिद के नाम भी शामिल किए गए हैं।

अंतर्राष्ट्रीय़ आतंकवादी सरगना हाफिज सईद।

वर्ष 2008 में मुंबई हमलों के बाद भारत इसमें हाफिज सईद की संलिप्तता के कई सबूत पाकिस्तान को सौंप चुका है। लेकिन इस घटना के 8 साल बाद अचानक सईद को आतंकवादी मानने की स्वीकृति के कई मायने हो सकते हैं।

हाल के दिनों में पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद की केन्द्र-स्थली के रूप में कुख्यात हो गया है। खासकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के इस्लामिक आतंकवाद पर कड़े रुख के बाद अब पाकिस्तान को भी लगने लगा है कि आतंकवाद को राज्य नीति के रूप में अब वह अधिक दिनों तक नहीं चला सकता। इसलिए माना जा सकता है कि पाकिस्तान पर इस बात का भारी दबाव है कि वह आतंकियों पर कार्रवाई करे। हालांकि, यह जगजाहिर है कि पाकिस्तान चाह कर भी इस्लामिक आतंकवाद से मुक्त नहीं हो सकता, क्योंकि यह पूरे तंत्र में अपने जड़ें जमाए बैठा है।


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पाकिस्तान में सक्रिया हैं कई आतंकवादी समूह।



यही वजह है कि ऐसा मानने से कोई गुरेज नहीं होना चाहिए कि हाफिज सईद पर ताजा कार्रवाई पाकिस्तान का कोई नया पैंतरा हो सकता है, क्योंकि सईद को अपनी आतंकवादी गतिविधियों के लिए पाकिस्तान में खुली छूट मिलती रही है।

पाकिस्तान आतंकवादी संगठनों पर दिखावे की कार्रवाई करता रहा है।

पिछले 30 जनवरी को हाफिज सईद को उसके चार सहयोगियों के साथ नजरबंद कर दिया गया था। अपनी गिरफ्तारी के बाद हाफिज सईद ने आरोप लगाया था कि उसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की वजह से गिरफ्तार किया गया है।

सईद ने आरोप लगाया है कि उस पर कार्रवाई के लिए डोनाल्ड ट्रम्प तथा नरेन्द्र मोदी जिम्मेदार हैं।

सईद को 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमले के बाद भी नजरबंद किया गया था, लेकिन 2009 में अदालत ने उसे रिहा कर दिया था।


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