दिवाली के मौके पर यहां दी जाती है उल्लुओं की बलि, अंधविश्वास के पीछे है अजीब मान्यता

Updated on 2 Nov, 2018 at 7:12 pm

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दुनिया में हर कोई ऐश्ववर्य और वैभव की लालसा रखता है। आखिर कुछ भी करें, धन की ज़रुरत होती ही है। मूलभूत ज़रूरतों के लिए भी धन पर निर्भरता होती है और इसीलिए लोग धनोपार्जन की इच्छा से काम-धंधे में लगे होते हैं। इतना ही नहीं, इस इच्छा से वे भगवती लक्ष्मी को भी प्रसन्न करते हैं ताकि उन पर धन की वर्षा हो।

 

लेकिन अंधविश्वास पर किसी जीव की हत्या करना किसी भी सूरत में न धर्म संगत है और न मानवीय है।

 


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उल्लू को लक्ष्मी का वाहन माना जाता है। इस लिहाज़ से लोग इस दिन उल्लू की पूजा करते हैं। दीपावली पर उल्लू के दर्शन को शुभ माना गया है। लेकिन कुछ लोग अंधविश्वास के चक्कर में धन और यश पाने की चाहत में दिवाली की रात उल्लुओं की बलि चढ़ाते हैं। ये लोग धड़ल्ले से ऐसा करते हैं जो न धर्म संगत है और न कानूनी रूप से सही है।

 

उत्तराखंड में दिवाली पर उल्लू की बलि देकर कई तरह के अनुष्ठान की बात सामने आती है। दिवाली के मौके पर लोग गैरकानूनी तरीके से उल्लू की तस्करी करते हैं। दीपावली के आसपास ये उल्लू लगभग 10 से 20 हजार में लोग खरीदते हैं। कुछ दिन पहले से इस उल्लू को दारू पिलाई जाती है और दीपावली के दिन इसकी बलि देकर पूजा-पाठ किया जाता है।

अब ये सोचने की बात है भगवती लक्ष्मी वैष्णव प्रवृति की देवी हैं और उन्हें भला किसी जीव की बलि देकर कैसे खुश किया जा सकता है!

 

 

उल्लू को मारना या बलि देना दोनो गैरकानूनी है। दिवाली के मौके पर उल्लू के शिकार को लेकर उत्तराखंड वन विभाग हाई अलर्ट भी जारी करता है। जंगलों के साथ बाजारों और धार्मिक स्थलों पर निगरानी रखी जाती है। लेकिन इसके बावजूद इनकी तस्करी होती है। बता दें भारतीय कानून के अंतर्गत जो ऐसा करते पकड़ा गया उसको जेल तक हो सकती है। उल्लू की तस्करी करने की सज़ा 3 साल की तय की गई है।

दीपावली के अवसर पर कई प्रकार की असामाजिक मान्यताएं हैं जिन्हें दूर करने की जरूरत है। ये धर्म और समाज दोनों के हित में नहीं है।


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