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इस इंडियन डॉक्यूमेंट्री को मिला ऑस्कर, जानिए ऐसा क्या ख़ास है इसमें

Updated on 26 February, 2019 at 1:18 pm By

भले ही हम कितने दावे कर लें, लेकिन महिलाओं के लिए आज भी समाज में सब कुछ सामान्य नहीं है। पहले की तुलना में स्थिति थोड़ी ज़रूर सुधरी है, लेकिन अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है। अगर सही दिशा में चला जाए तो एक बेहतर माहौल बन सकता है। इस बार भारतीय डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म ‘पीरियड. एंड ऑफ़ सेंटेंस’ को ऑस्कर में नामांकन किया गया है। ये फ़िल्म महिलाओं से जुड़े ज़बरदस्त मुद्दे को उजागर करती हैं, साथ ही समाधान की दिशा में कदम बढ़ाती है। ये पीरियड के दौरान होने वाली समस्याओं के साथ ही महिलाओं को खुलकर जीने की राह बताती है।


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ये डॉक्यूमेंट्री हापुड़ जिले की महिलाओं की कहानी है। इसमें बताया गया है कैसे मासिक धर्म के समय महिलाओं की दिनचर्या बदल जाती है। इस दौरान उनमें जो झिझक होती है, उस पर भी जोरदार तरीके से बात की गई है। साथ ही पैड्स के अभाव सहित मासिक धर्म के चलते सपनों को समाप्त करती लड़कियों को भी दिखाया गया है। पीरियड्स से जुड़ी भ्रांतियों से जूझती महिला के संघर्ष को इस फ़िल्म में दर्शाया गया है।

 

 

वैसे तो ऑस्कर के लिए भारत से अब तक कई फिल्में जा चुकी हैं, लेकिन इस फिल्म में कुछ खास था जिसके चलते फिल्म को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर खासा सराहा गया और  91वें एकेडमी अवॉर्ड्स ‘ऑस्कर 2019 पुरस्कारों में ‘बेस्ट डॉक्युमेंट्री शॉर्ट सब्जेक्ट’ कैटेगरी में इस फिल्म को ऑस्कर अवॉर्ड दिया गया। ये फिल्म मशहूर भारतीय प्रोड्यूसर गुनीत मोंगा की है। गुनीत ने इससे पहले मसान और गैंग्स ऑफ वासेपुर जैसी फिल्मों से खासी शोहरत पाई है। फिल्म को रयाक्ता जहताबची और मैलिसा बर्टन ने निर्देशित किया है।

ऑस्कर अवॉर्ड मिलना हर निर्देशक के लिए खास होता है। ऐसे में किसी भी डायरेक्टर का भावुक होना स्वाभाविक है। अवॉर्ड मिलने के बाद इस टीम ने जिस तरह स्पीच दी वो काफी मज़ेदार था।


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25 मिनट की इस डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म ‘पीरियड. एंड ऑफ़ सेंटेंस’ में रियल लाइफ़ पैडमैन अरुणाचलम मुरुगनाथम खुद हैं। ये फ़िल्म उनके ही अथक प्रयासों पर फ़िल्माई गई है। फिल्म का निर्देशन गुनीता मोंगा और सह निर्देशन निर्माण मोंगा ने किया है।

 

ये फ़िल्म उत्तरी भारत के हापुड़ की लड़कियों और महिलाओं के गांव में पैड मशीन की स्थापना के इर्द-गिर्द घूमती है। पैड की उपलब्धता के बाद उनकी ज़िन्दगी में क्या बदलाव आए, फ़िल्म में इसपर प्रकाश डाला गया है।

 

 

 


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बताते चलें डॉक्यूमेंट्री और सैनिटरी पैड मशीन को लॉस एंजिल्स में रहने वाले स्टूडेंट्स ने क्राउडफ़ंड किया है। महज़ पीरियड महिलाओं को आगे बढ़ने से नहीं रोक सकता। समय आ गया है सुदूर क्षेत्रों तक इस दिशा में महिलाओं को जागरूक किया जाए। इस दिशा में सबको मिलकर कदम बढ़ाने की ज़रूरत है।

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