राज़ी-पद्मावत जैसी कई बड़ी फ़िल्मों को पछाड़ ‘विलेज रॉकस्टार्स’ को मिली ऑस्कर में एंट्री

Updated on 23 Sep, 2018 at 11:06 pm

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बॉलीवुड के गढ़ मुंबई में हर साल हजारों फिल्में बनती हैं, जिनमें बड़े बजट की बहुत सी फिल्में भी शामिल हैं । ऐसी कई बड़ी फिल्में है, जिन्हें बॉक्स ऑफिस पर तो खासी वाहवाही मिली, मगर ये फिल्में अंतराष्ट्रीय मानकों पर खरी नहीं उतर सकीं। इस साल मंटो, राजी, और पद्मावत जैसी फिल्मों को भारत में काफी सराहा गया था। इसके अलावा बहुत से लोगों को इन फिल्मों के ऑक्सर तक पहुंचने की भी उम्मीद थी, लेकिन इन सभी बड़ी फिल्मों को पछाड़ इस बार असम की एक फिल्म ने ऑक्सर के लिए बाजी मार ली।

 

 

रीमा दास के निर्देशन में बनी इस फिल्म का नाम है विलेज रॉकस्टार। फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया ने बताया कि फिल्म की कहानी गुर्बत में पली-बढ़ी एक लड़की घुनू के जीवन के इर्द- गिर्द घूम रही है, जिसका यह सपना है कि एक दिन उसका अपना गिटार और रॉक बैंड हो।

इसके साथ ही उस गांव के अन्य बच्चे जो निम्ग मध्यम वर्गीय परिवारों से आते हैं, उनके सपनों को बड़ी ही फिल्म के जरिए बड़ी ही खूबसूरती से पर्दे पर उतारा गया है।


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बता दें कि काफी दिनों से लोग  इस बात इंतजार कर रहे थे कि आखिर इस बार ऑस्कर में कौन सी भारतीय फिल्म नामांकित होगी। इस फेहरिस्त में राजी, पद्मावत और मंटो जैसी कई बड़ी फिल्में शामिल थीं, लेकिन इन सबको पछाड़ इस असमी फिल्म ‘विलेज रॉकस्टार’ ने बाजी मारी। रीमा दास के निर्देशन में बनी ये फिल्म अब 91वें एकेडमी अवॉर्डस में बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज कैटिगरी में भारत का प्रतिनिधित्व करती नज़र आएगी। ये फिल्म सभी अंतर्राष्ट्रीय मानकों पर खरी उतरी है।

 

 

जूरी मेंबर अंनत महादेवन ने साल 2018 की ‘विलेज रॉकस्टार’ फिल्म को भारत की सबसे बेहतरीन फिल्म बताया है उनका कहना है कि यह फिल्म सभी अंतर्राष्ट्रीय मानकों पर खरी उतरी है हमें गर्व है कि यह फिल्म भारत की तरफ से ऑस्कर के लिए चुनी गई है उन्होनें यह भी बताया कि ऑस्कर के लिए किस तरह की फिल्मों का चुनाव किया जाता है। अनंत के मुताबिक जो फिल्में भारतीय जड़ों से जुड़ी होती है,साथ ही जो अंतर्राष्ट्रीय दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित कर सके, वही फिल्में भारत की तरफ से ऑस्कर के लिए चुनी जाती हैं।

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