भारत के इस जेल में ऑर्गेनिक खेती की तैयारी, कैदियों को मिलेगा प्रशिक्षण

Updated on 30 Oct, 2017 at 1:55 pm

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ओडिशा के सबसे पुराने बालासोर जिला जेल में ऑर्गेनिक खेती शुरू की जा रही है। ख़ास बात ये है कि खेती कैदियों द्वारा की जाएगी। उन्हें प्रशिक्षित करने के लिए जैविक कृषि विशेषज्ञ की नियुक्ति की जा चुकी है। .विशेषज्ञ जेल परिसर में सब्जियों की अनुकूल उपज की प्रक्रिया में सहयोग करेंगे और कैदियों का मार्गदर्शन कर उन्हें इस खेती के लिए तैयार करेंगे।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इस खेती के माध्यम से जेल प्रशासन की आय बढ़ेगी, साथ ही कैदियों को ये लाभ मिलेगा। जब वे जेल से छूटकर निकलेंगे तब अपने जीवनयापन के लिए खेती जैसे काम को अपना सकते हैं। इस प्रक्रिया में कैदियों को जैविक खेती में सक्षम बनाकर उन्हें बेहतर जीवन के लिए प्रशिक्षित करने की योजना है।

फिलहाल कैदियों को अभी सर्दियों के दौरान कैसे पारंपरिक खेती कर सब्जियों का उत्पादन बढाया जाए, इसकी जानकारी दी जाएगी। अभी साल में लगभग 3 लाख रुपए की सब्जियां जेल काउंटर से बेची जाती हैं, जिसमें विभिन्न प्रकार के साग, व चावल भी शामिल हैं। जैविक खेती जेल की आय को बढाने के साथ ही कैदियों के जीवन में नया सवेरा लाने का काम करेगा।

एक्सप्रेस की रिपोर्ट में जेल के निदेशक विजय कुमार शर्मा के हवाले से बताया गया हैः


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“ऑर्गेनिक खेती से उत्पादन तीन से चार गुना बढ़ सकती है और जेल प्रशासन वर्मीकंपोस्ट के लिए जरूरी कच्चा माल प्रदान कर सकते हैं। जेल के अंदर ही एक वर्मीकंपोस्ट एक्सटेंशन भी बनाया जाएगा।”

वर्मीकंपोस्ट एक खाद उत्पाद है जो कृमि के विभिन्न प्रजातियों का उपयोग करने वाली सब्जी या खाद्य अपशिष्ट के मिश्रण से बनता है। जेल के अन्दर मौजूद पांच एकड़ जमीन में फिलहाल खेती शुरू की जाएगी।

ऑर्गेनिक कृषि विशेषज्ञ के अनुसार, खाद बनाने के काम में बैल और गायों के दो जोड़े की आवश्यकता होगी। यहां अगर यह योजना सफल होती होती है तो जेल प्रशासन इसे अन्य जेलों में भी लागू करने पर सोच सकती है।

सभी तस्वीरें सांकेतिक हैं।

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