एक सेकंड की देरी से आएगा नया साल 2017, जोड़ा जा रहा है ‘लीप सेकंड’

author image
Updated on 1 Jan, 2017 at 6:27 pm

Advertisement

नए साल का आगाज एक सेकंड की देरी से होगा। इस बार साल 2016 एक सेकंड की देरी से खत्म होगा तो वहीं नया साल 2017 एक सेकंड की देरी से आएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि इस साल 31 दिसंबर में एक लीप सेकंड जोड़ा जा रहा है। यह लीप सेकंड सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि विश्वरस्तर पर जोड़ा जा रहा है।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यूनिवर्सल टाइम के हिसाब से 31 दिसंबर को UTC 23:59:59 के समय में एक लीप सेकंड जोड़ा जाएगा। वहीं, भारतीय समय के अनुसार, यहां पर लीप सेकंड 1 जनवरी को  भारतीय मानक समय (IST) 05:29:59 में जोड़ा जाएगा।

time

सुनने में यह प्रक्रिया जितनी सरल लगती है उतनी है नहीं। भारतीय मानक समय के कस्टोडियन का कार्य नेशनल फिजिकल प्रयोगशाला (एनपीएल) के जिम्मे है।

1 सेकंड जोड़ना सुनने में तो काफी सरल लगता है, लेकिन इस पर खगोल, सैटेलाइट नेविगेशन और देश के सारे संचार माध्यम निर्भर करते हैं।


Advertisement

आपको बता दे कि कोऑर्डिनेटेड यूनिवर्सल टाइम यानी UTC में समय को बिल्कुल सही रखने के लिए, समय-समय पर लीप सेकंड को जोड़ा जाता है। UTC दुनिया भर में अलग-अलग देशों में लगी हुई 300 परमाणु घड़ियों की शुद्धता पर आधारित एक समय प्रणाली है।

time

 

जानिए क्या होता है लीप सेकंड:

हम सब यह जानते है कि अपने अक्ष पर घूमने की वजह से पृथ्वी पर दिन और रात होती है। पृथ्वी का एक घुमाव तकरीबन 24 घंटे में लगता है।वैज्ञानिक भाषा में इस प्रक्रिया को खगोलीय समय कहते हैं। अपने अक्ष पर घूमती पृथ्वी के चक्र लगाने की गति में कभी तेजी आ जाती है तो कभी धीमी हो जाती है।

ऐसा कई कारकों की वजह से होता है जिनमें पृथ्वी पर लगने वाले चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण बल शामिल हैं, जिनसे अक्सर समुद्र में ज्वार आता है।

जब खगोलीय घड़ी और परमाणु घड़ी  में 0.9 सेकंड का अंतर आता है तो परमाणु घड़ी में लीप सेकंड को जोड़कर इसका मिलान खगोलीय घड़ी से कर दिया जाता है। कुछ ऐसा ही 31 दिसंबर को भी होने जा रहा है। यह पहली बार नहीं है। इससे पहले 1972 से लेकर अब तक 36 बार दुनिया की घड़ी में लीप सेकंड जोड़े गए हैं।

Advertisement

आपके विचार


  • Advertisement