“साथ में रात बिताई तो क्या, यह शादी थोड़े ना हुई”

Updated on 11 Jun, 2017 at 12:51 pm

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वन-नाइट स्टैंड या किसी महिला और पुरुष के बीच बनने वाला शारीरिक संबंध हिंदू लॉ के तहत शादी के दायरे में नहीं आता। यह बात बॉम्बे हाई कोर्ट ने हाल के अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में कही है।

कोर्ट के अनुसार, वन-नाइट स्टैंड के बाद बिना शादी के अगर बच्चे का जन्म होता है तो बच्चे का पिता की संपत्ति में कोई अधिकार नहीं हो सकता है।

शादी या महिला-पुरुष के संबंध को मान्यता के लिए पारंपरिक रीति-रिवाज या फिर कानूनी प्रक्रिया के तहत शादी करना जरूरी होता है।इच्छा से या दुर्घटनावश बने शारीरिक संबंध शादी नहीं होती।




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जस्टिस मृदुला भटकर ने कहा कि हिंदू मैरेज ऐक्ट की सेक्शन 16 इस तरह के संबंध को शादी की मान्यता नहीं देती, लेकिन कोर्ट ने साथ ही कहा कि समाज बदलाव के दौर से गुजर रहा है। लिव-इन रिलेशनशिप और ऐसे संबंध से बच्चों के जन्म ने कठिन मसले को जन्म दिया है।

हिंदू मैरेज ऐक्ट के तहत बच्चे के अधिकार के लिए शादी को साबित करना जरूरी होता है, भले वह शादी बाद में अवैध घोषित कर दी गई हो। कोर्ट एक व्यक्ति के मामले में सुनवाई कर रहा था, जिसकी दो पत्नियां थीं। जब यह बात साबित हो गई कि व्यक्ति ने दूसरी बार शादी की थी, कोर्ट ने उसकी दूसरी शादी को अवैध घोषित कर दिया। हालांकि, उसकी दूसरी पत्नी से जन्म लेने वाली बच्ची को संपत्ति में अधिकार दिया गया।


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