जानिए कैसे हैं भारत के हज़ारों साल पुराने 14 मंदिर

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Updated on 7 Jan, 2017 at 12:39 pm

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भारत मंदिरों का देश है। हजारों साल पहले सनातन धर्म के उत्थान के साथ ही यहां मंदिर और देवालय बनने लगे थे। आज दुनिया में सबसे अधिक मंदिर भारत में हैं। हम यहां उन 14 मंदिरों का जिक्र करने जा रहे हैं जो हजारों साल पुराने हैं। यहां रही यह सूची।

1. शोर मंदिर, महाबलीपुरम, तमिलनाडु

यहां के शोर मंदिर को दक्षिण भारत के सबसे प्राचीनतम मंदिरों में माना जाता है। मान्यताओं के मुताबिक, यह मंदिर बना था आठवीं शताब्दी में। यह द्रविड़ वास्तुकला का बेहतरीन नमूना है। यह स्थित है चेन्नई से करीब 55 किलोमीटर दूर बंगाल की खाड़ी के तट पर। यहां दरअसल तीन मंदिरों का एक समूह है। बीच में भगवान विष्णु का मंदिर है, जिसके दोनों तरफ शिव मंदिर हैं।

2. सोमनाथ मंदिर, गुजरात

सोमनाथ 12 ज्योतिर्लिंगों में सर्वप्रथम हैं। मान्यताओं के मुताबिक, इस मंदिर का निर्माण स्वयं चन्द्रदेव ने किया था। इस वैभवशाली मंदिर को इस्लामिक आक्रान्ताओं ने कई बार लूटा और तोड़ा। यह मंदिर मंदिर इतना पुराना है कि इसका उल्लेख ऋग्वेद में भी मिलता है।


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3. अंबरनाथ मंदिर, महाराष्ट्र

यह प्राचीनतम हिन्दू शिल्पकला की अतुलनीय मिसाल है। कहा जाता है कि इसे 11वीं शताब्दी के मध्य में बनाया गया था। साथ ही मान्यता है कि इसके जैसा मंदिर दुनिया में अन्यत्र कहीं नहीं बना। यहां पर वर्ष 1060 ई. का एक प्राचीन शिलालेख भी पाया गया है। इस अनोखे मंदिर को शिलाहाट नरेश मांबणि द्वारा निर्मित है।

4. बृहदेश्वर मंदिर, तमिलनाडु

तमिलनाडु में स्थित बृहदेश्वर मंदिर एक हिंदू मंदिर है। यह अपने समय के विश्व के विशालतम संरचनाओं में गिना जाता था। इस मंन्दिर का निर्माण कार्य 1003-1010 ई. के बीच चोल शासक राजाराज चोल प्रथम ने करवाया था। उनके नाम पर इसे राजराजेश्वर मन्दिर का नाम भी दिया जाता है।

5. कैलाश मंदिर, महाराष्ट्र

एलोरा का कैलाश मन्दिर महाराष्ट्र के औरंगाबाद ज़िले में प्रसिद्ध ‘एलोरा की गुफ़ाओं’ में स्थित है। यह प्राचीन भारतीय सभ्यता का जीवंत प्रदर्शन करता है। शिव का यह दोमंजिला मंदिर पर्वत की ठोस चट्टान को काटकर बनाया गया है।

6. लिंगराज मंदिर, भुवनेश्वर, ओडिशा

भुवनेश्वर में स्थित लिंगराज मंदिर भारत के प्राचीनतम मंदिरों में से एक है। लिंगराज का विशाल मन्दिर अपनी अनुपम स्थापत्यकला के लिए प्रसिद्ध है। मन्दिर में प्रत्येक शिला पर कारीगरी और मूर्तिकला का चमत्कार है। इस मंदिर का निर्माण सोमवंशी राजा जजाति केशरि ने 11वीं शताब्दी में करवाया था।

7. केदारनाथ मंदिर, उत्तराखंड

केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड का सबसे विशाल शिव मंदिर है। इसे कटवां पत्थरों के विशाल शिलाखंडों को जोड़कर बनाया गया है। उत्तराखंड में हिमालय पर्वत की गोद में केदारनाथ मन्दिर बारह ज्योतिर्लिंग में सम्मिलित होने के साथ चार धाम और पंच केदार में से भी एक हैं।

8. बद्रीनाथ मंदिर, उत्तराखंड

यह मंदिर भगवान विष्णु के रूप बद्रीनाथ को समर्पित है। बद्रीनाथ उत्तर दिशा में हिमालय की उपत्यका में अवस्थित हिन्दुओं का मुख्य यात्राधाम माना जाता है। यह भारत के चार धामों में प्रमुख तीर्थ-स्थल है।

9. द्वारिकाधीश मंदिर, गुजरात

5000 वर्ष पूर्व भगवान कृष्ण ने मथुरा छोड़ने के बाद द्वारका नगरी बसाई थी। जिस स्थान पर उनका निजी महल ‘हरि गृह’ था वहाँ आज प्रसिद्ध द्वारकाधीश मंदिर है। इसलिए कृष्ण भक्तों की दृष्टि में यह एक महत्वपूर्ण तीर्थ है अौर द्वारका नगरी शंकराचार्य द्वारा स्थापित देश के चार महत्वपूर्ण धामों में से एक है।

10. पुष्कर का ब्रह्मा मंदिर, राजस्थान

पुष्कर राजस्थान में प्रसिद्ध तीर्थस्थान है। अजमेर से करीब 11 किलोमीटर दूर यहां ब्रह्मा का एक मंदिर है। मान्यताओं के मुताबिक, ब्रह्मा ने यहां आकर यज्ञ किया था। यहां कार्तिक पूर्णिमा को प्रसिद्ध पुष्कर मेला का आयोजन होता है।

11. कुंभेश्वर मंदिर, कुंभकोणम, तमिलनाडु

शिव को समर्पित ये चोल मंदिर तमिलनाडु में स्थित है। इसे लगभग नौवीं सदी में बनाया गया था।

12. श्री वरदराजा पेरुमल मंदिर, तमिलनाडु

श्री वरदराजा पेरुमल मंदिर तामिरभरणी नदी के तट पर स्थित है। इस मंदिर को सदियों पहले राजा कृष्णवर्मा ने बनवाया था। श्री वरदराजा पेरूमल के एक कट्टर अनुयायी थे। इस मंदिर के दर्शन करना एक फलदायक अनुभव होता है।

13. बादामी मंदिर, कर्नाटक

कर्नाटक के बगलकोट में स्थित बादामी गुफा हिंदू और जैन धर्म के चार मंदिर अपनी खूबसूरत नक्काशी, कृत्रिम झील और शिल्पकला के लिए प्रसिद्ध हैं। सुनहरे बलुआ पत्थर की चट्टानों को काटकर बनाए गए इस सुंदर मंदिर का दृश्य अत्यंत आकर्षित करता है। बादामी गुफा में दो मंदिर भगवान विष्णु, एक भगवान शिव को समर्पित है और चौथा जैन मंदिर है।

14. चेन्नाकेसवा मंदिर, कर्नाटक

होयसला सल्तनत द्वारा 10वीं से 11वीं सदी के बीच इसे बनवाया गया था। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है।

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