भारत में बने इस रम ने अच्छे-अच्छे ब्रांड्स को दी है पटखनी, ब्रिटिश काल से जुड़ा है इसका इतिहास

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Updated on 8 Apr, 2017 at 8:31 pm

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ओल्ड मॉन्क डार्क रम ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है। अच्छे से अच्छे ब्रांड्स को पछाड़ते हुए इसने सबसे बेहतरीन रम का दर्जा हासिल किया हुआ है। इसकी शुरुआत 1960 में हुई थी, जब इस रम को डिफेंस फोर्स की कैंटीन में बेचना शुरू किया गया।

बढ़िया क्वालिटी और बेहतरीन स्वाद की वजह से यह लोगों में बेहद लोकप्रिय हुआ।

जल्द ही इसका नाम दुनिया के नामी रम ब्रान्ड में शुमार हो गया। सस्ता होने की वजह से यह सभी का चहेता भी बना।

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आज भी ओल्ड मॉन्क ने अन्य रम ब्रान्ड्स की तुलना में लोगों को अधिक दीवाना बना रखा है। हालांकि, इससे जुड़े एक इतिहास के बारे में आपको शायद ही पता हो।

वर्ष 1855 का दौर था जब भारत में बियर का चलन नहीं था। भारत में अंग्रेज दूसरे देशों से बियर मंगवाते थे, जो समुद्री रास्ते से होते हुए करीबन 6 महीने बाद यहां पहुंच सकती थीं।


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बियर को भारत में पहुंचने में लम्बा समय लगता था। इसका हल निकालते हुए उस वक्त स्कॉटलैंड के बिजनेसमैन एडवर्ड डायर ने हिमाचल प्रदेश के कसौली में बियर के कारखाने की शुरुआत की।

आपको बता दें कि एडवर्ड डायर अमृतसर में जलियांवाला बाग हत्याकांड का आदेश देने वाले जनरल रेजिनाल्ड डायर के पिता थे।

कंपनी ने लायन बियर नाम से बियर बेचना शुरू किया, जो जल्द ही लोकप्रिय हो गया।

बाद में पानी की किल्लत की वजह से इस कारखाने को हिमाचल के ही सोलन में शिफ्ट कर दिया गया।

इस कंपनी का नाम पहले एच. जी. मीकिन्स था, जो बाद में डायर-मीकिन्स बन गया। फिर एक वक्त ऐसा आया जब मीकिन्स कर्जग्रस्त हो गया। उस वक्त एक भारतीय शख्स मदद के लिए आगे आए।

बियर के इस कारखाने में एक भारतीय शख्स एन. एन. मोहन कांच की बोतल सप्लाई किया करते थे। कर्ज में चल रही मीकिन्स ने मोहन से पैसे उधार लेने शुरू कर दिए।

फिर 1947 में भारत की आजादी के बाद मोहन ने बियर के इस कारखाने को मीकिन्स से खरीद लिया। 1967 में डायर मीकिन्स के अंतर्गत बनने वाली बियर का नाम बदलकर मोहन मिकिंस कर दिया गया।

इस कारोबार से होने वाले मुनाफे का स्वर्गीय एन. एन. मोहन ने कई स्कूल और पार्क बनाने में इस्तेमाल किया। उन्हें अपनी सेवाओं के लिए पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया था।

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जहां तक ओल्ड मॉन्क की बात है तो इसने बिना किसी विज्ञापन या पब्लिसिटी के लोगों को अपना दीवाना बनाए रखा है। एक बार जिसने ओल्ड मॉन्क पी ली, उसके जीभ पर नहीं, बल्कि उसके दिमाग पर इसका स्वाद चढ़ ही जाता है।

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