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इस गांव में शादीशुदा महिलाएं साल के 5 दिन नहीं पहनती हैं कपड़े

Published on 24 October, 2018 at 6:38 pm By

विविधताओं से भरे भारत में न जाने कितनी ही परंपराएं है। इस देश के समाज में आज भी रीति-रिवाजों का बोलबाला है। यहां कई ऐसी प्रथाएं है जिसे नई पीढ़ी स्वीकार नहीं करना चाहती, लेकिन भारत के बहुत से गांव में बसे लोगों ने इस दौर में भी अपनी पुरानी संस्कृति और रिवाजों को संजोकर रखा हुआ है। आप भले ही उनकी सोच को रूढ़िवादी करार दें, मगर उनका जीवन इन मान्यताओं के इर्द-गिर्द ही घूमता है। हम आपको भारत के एक ऐसे ही गांव के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां आज भी लोग सदियों पुरानी मान्यता का पालन करते हैं।


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भारत के इस गांव में महिलाएं नहीं पहनती हैं कपड़े- Women Does Not Wear Cloth In This Village Of India

 

हिमाचल में बसे एक गांव में महिलाएं ऐसी परंपरा का पालन करतीं हैं, जिसे सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे। यहां आज भी शादीशुदा महिलाएं साल में 5 दिन निर्वस्त्र रहती हैं।

 

भारत के इस गांव में महिलाएं नहीं पहनती हैं कपड़े- Women Does Not Wear Cloth In This Village Of India

 


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यहां हम जिस अनोखे गांव का जिक्र कर रहे हैं, उसका नाम पीणी है। हिमाचल के मणिकर्ण घाटी में स्थित पीणी गांव में शादीशुदा महिलाओं को हर साल 5 दिनों तक बिना वस्त्रों के ही रहना पड़ता है।



इस दौरान महिलाएं ऊन से बने पट्टू (पारंपरिक पोशाक) को अपने तन पर ओढ़ लेतीं है। इन पांच दिनों के दौरान पति-पत्नी न तो बातचीत करते हैं और न ही एक दूसरे के करीब आते हैं। दोनों एक दूसरे से अनजानों की तरह बर्ताव करते हैं। इतना ही नहीं, इस परंपरा के दौरान पुरुषों को शराब का सेवन करने की भी मनाही होती है।

 

भारत के इस गांव में महिलाएं नहीं पहनती हैं कपड़े- Women Does Not Wear Cloth In This Village Of India

 

17 अगस्त से 21 अगस्त के दौरान गांव के लोग काला महीना मनाते हैं। इस परंपरा को स्थानीय लोग इसलिए मनाते हैं, क्योंकि इससे वो देवताओं को खुश करना चाहते हैं। हिमाचल में रहने वाला ये एक ऐसा समुदाय है जो अपने दायरे में रहकर ही इस प्रथा को मनाता है। इस प्रथा को मानने के पीछे उनकी अपनी मान्यता है।

इस समुदाय का मानना है लहुआ घोंड देवता जब पीणी गांव पहुंचे थे तो उस वक्त राक्षसों का बोलबाला था। लेकिन देवता के पीणी में पांव रखते ही राक्षसों का अंत हो गया। इसके बाद से ही यहां इस परंपरा की शुरुआत हो गई। आज महिलाएं यहां 17 से 21 अगस्त के दौरान पारंपरिक पहनावा पट्टू पहनकर माता भागासिद्ध और लाहुआ घोंड देवता की आराधना करतीं हैं।

 


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