नहीं मिली एम्बुलेन्स की सेवा तो पत्नी की लाश को कंधे पर लेकर निकल पड़ा यह मांझी

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Updated on 25 Aug, 2016 at 12:28 pm

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उड़ीसा का कालाहांडी जिला एक बार फिर चर्चा में है। इस बार यह जिला भूख से हो रही मौतों की वजह से चर्चा में नहीं है, बल्कि चर्चा का विषय एक अन्य दुर्भाग्यपूर्ण खबर है। यहां के आदिवासी समुदाय के एक व्यक्ति को अपनी पत्नी के शव को लेकर करीब 10 किलोमीटर तक चलना पड़ा।

दरअसल, उसे अस्पताल से घर तक शव को ले जाने के लिए एम्बुलेन्स की सेवा नहीं मिली थी।

इस रिपोर्ट के मुताबिक, 48 वर्षीय दाना मांझी को स्थानीय लोगों ने 42 वर्षीया पत्नी अमंग देई के शव को कंधे पर लादकर जाते हुए देखा। क्षय रोग से लंबे समय से लड़ रही अमंग की मौत मंगलवार की रात भवानीपटना में जिला मुख्यालय अस्पताल में हो गई थी।

दाना मांझी जब अपनी पत्नी के शव को कंधे पर लादकर घर ले जा रहे थे, उस वक्त उनकी 12 साल की बेटी भी साथ थी।


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इस रिपोर्ट में मांझी के हवाले से बताया गया है कि तमाम कोशिशों के बाद जब कोई मदद नहीं मिली तो उन्होंने पत्नी के शव को कपड़े में लपेटा और उसे कंधे पर लादकर भवानीपटना से करीब 60 किलोमीटर दूर रामपुर ब्लॉक के मेलघारा गांव के लिए पैदल चलना शुरू कर दिया।

स्थानीय पत्रकारों के माध्यम से जब यह बात जिला कलेक्टर ब्रुंदा डी तक पहुंची तब उन्होंने बाकी के 50 किलोमीटर की यात्रा के लिए एंबुलेन्स की व्यवस्था की।

यह वाकया ऐसे समय में हुआ है, जब राज्य में नवीन पटनायक की सरकार ने ‘महापरायण’ योजना की शुरुआत की है। इस योजना के तहत सरकारी अस्तपताल से मृतक के घर तक शव को पहुंचाने के लिए मुफ्त परिवहन की सुविधा दी जाती है।

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