20 साल तक अमेरिका के परमाणु हथियारों का ‘लॉन्च कोड’ यह रहा था!

Updated on 1 Oct, 2017 at 6:50 pm

Advertisement

आज दूसरे देशों को परमाणु हथियार न बनाने की हिदायत देने वाले अमेरिका ने जब खुद गुपचुप तरीके से न्यूक्लियर मिसाइल बनाए थे और किसी को कानों-कान खबर तक नहीं हुई थी। अमेरिका और सोवियत यूनियन (रूस) के बीच शीत युद्ध के दौरान दोनों ही देश एक-दूसरे पर परमाणु हमले की तैयारी में थे। अमेरिका उस समय पूरी तरह रूस पर हमला करने के मूड में था और हर बार वह पहले से ज़्यादा आक्रामक तेवर दिखाता था। वैसे एक बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि ये न्युक्लियर मिसाइलें आखिर लॉन्च कैसे होती हैं? हालांकि,  सालों बाद अब जाकर इस राज़ पर परदा हटा है। कहा जा रहा है कि इसके सीक्रेट रहने की वजह इसका लॉन्च कोड है। जी हां, अमेरिका ने करीब 20 साल तक मिसाइल का लॉन्च कोड ‘00000000’ रखा था। यह कोड 1962 में नेशनल सिक्युरिटी एक्शन मेमोरेंडम 160 साइन करने के बाद कार्रवाई में आया था।

अमेरिका ने जो भी परमाणु हथियार बनाए। उन सब में परमिसिव एक्शन लिंक Permissive Action Link (PAL) था। यह एक छोटा सा यंत्र है, जो यह सुनिश्चित करता है कि मिसाइल सही व्यक्ति द्वारा और सही कोड डालने के बाद ही लॉन्च हो।

दरअसल, अमेरिका के परमाणु हथियार दूसरे देशों में भी स्थापित थे। ऐसे में अमेरिकी सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि यदि उन देशों में नेतृत्व में बदलाव या अस्थिरता आई तो वहां की सरकारें अमेरिका के परमाणु हथियारों का इस्तेमाल न कर सकें। यही वजह है कि सभी हथियारों को परमिसिव एक्शन लिंक से जोड़ा गया था।


Advertisement

सैनिकों की सहूलियत के लिए भी कोड ‘00000000’ रखा गया, ताकि ज़रूरत पड़ने पर व आसानी से मिसाल दाग सकें। वर्ष 1970 से 1974 तक मिनटमैन लॉन्च ऑफिसर के रूप में काम करने वाले डॉ. ब्रूस जी ब्लेयर ने न्यूक्लियर कमांड और कंट्रोल सिस्टम पर कई लेख लिखे।

एक बार उन्होंने पत्र में लिखा था कि स्ट्रैटिजिक एयर कमांड को इस बात की ज़रा भी परवाह नहीं थी कि कोई मिसाइल का गलत इस्तेमाल कर लेगा, बल्कि वो तो उन सुरक्षा मानकों को लेकर ज्यादा चिंतित रहते हैं, जो युद्ध के समय मिसाइल लॉन्च के लिए ज़रूरी होते हैं।

अपने लेख में उन्होंने यह भी साफ किया कि अमेरिका के निर्वाचित नेता और कमांड अधिकारी परमाणु हथियारों के मुद्दे पर कभी एकमत नहीं हुए थे। टुडे आई फाउंड आउट के मुताबिक, 1977 में ब्लेयर ने एक आर्टिकल लिखा, जिसमें उन्होंने बताया कि परमाणु कार्यक्रम को आतंकवादियों से खतरा हो सकता है। उनके मुताबिक सिर्फ 4 लोग मिलकर मिसाइल लॉन्च कर सकते हैं।

उनका आर्टिकल पब्लिश होने के बाद अमेरिका ने उसी साल अपने मिसाइल लॉन्च का कोड बदल दिया।

Advertisement

आपके विचार


  • Advertisement