अब नोट छपाई में सहयोग नहीं कर रहे तृणमूल समर्थक कर्मचारी, ओवरटाइम करने से इन्कार

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Updated on 29 Dec, 2016 at 9:16 pm

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पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार ने केन्द्र के साथ असहयोगात्मक रुख अख्तियार कर रखा है। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए अब तृणमूल समर्थक कर्मचारियों के समूह ने काम के दबाव का हवाला देते हुए नोटों की छपाई से इन्कार कर दिया है। यह मामला पश्चिम बंगाल के सालबनी स्थित सरकारी प्रिटिंग प्रेस का है, जहां इन दिनों नोटों की छपाई चल रही है। इस प्रेस में कर्मचारियों के एक समूह ने ओवरटाइम करने से इन्कार कर दिया है।

कर्मचारियों का कहना है कि वे 9 घंटे से अधिक की शिफ्ट में काम नहीं कर सकेंगे। इससे उनके सेहत पर असर पड़ रहा है। कर्मचारियों का यह समूह तृणमूल कांग्रेस से सहानुभूति रखता है और संघ के अध्यक्ष तृणमूल सांसद शिशिर अधिकारी हैं। इससे पहले कर्मचारी 9 घंटे से ज्यादा की शिफ्ट इसलिए कर रहे थे ताकि नोटों की छपाई हो सके।

भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राईवेट लिमिटेड (बीआरबीएनएमपीएल) कर्मचारी संघ ने अधिकारियों को एक नोटिस जारी कर कहा है कि 14 दिसंबर से लगातार ओवरटाइम शिफ्ट में काम करने की वजह से उनके कई सदस्य बीमार पड़ गए हैं।


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इस संबंध में शिशिर अधिकारी ने कहा है कि सालबनी की मुद्रा प्रिंटिंग प्रेस में कार्यरत कई कर्मचारी बीमार पड़ गए हैं। अधिकारी का कहना है कि कर्मचारियों के लगातार काम करते रहने से उनके परिवार पर भी इसका उल्टा असर पड़ रहा है। लोगों के पारिवारिक व सामाजिक काम-काज प्रभावित हो रहे हैं।

14 दिसंबर से अधिकारियों द्वारा सभी कर्मचारियों से 12 घंटे की शिफ्ट में मजबूरन काम कराया गया, ताकि 100 और 500 रुपये की मांग को पूरा किया जा सके।

गौरतलब है कि सालबनी के प्रिटिंग प्रेस में प्रतिदिन 96 मिलियन नोट छापे जाते हैं। इसके लिए यहां काम करने वाले कर्मचारियों को दो शिफ्टों में 12-12 घंटे की ड्यूटी करनी पड़ती है।

बताया गया है कि 9 घंटे की शिफ्ट में 34 मिलियन नोट प्रिंट होते हैं, जबकि 2 शिफ्ट्स में 68 मिलियन नोट प्रिंट्स होते हैं।

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