घर में टॉयलेट न होने को कोर्ट ने माना ‘अत्याचार’, पत्नी ने लिया तलाक

Updated on 22 Aug, 2017 at 1:47 pm

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ये कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि वास्तविकता है। एक पत्नी ने टॉयलेट न होने को लेकर तलाक की अर्जी दाखिल कर दी। कोर्ट ने भी उसी का साथ दिया और तलाक को मंजूरी दे दी। मामला राजस्थान के भीलवाड़ा जिले का है।

अदालत ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि घर में शौचालय का न होना महिला उत्पीड़न का मामला है। ये महिलाओं के सम्मान से जुड़ा है। आज के समय में भी शौचालय न बनवाना और फिजूलखर्ची करना निहायत ही मूर्खतापूर्ण है।

जस्टिस राजेंद्र कुमार शर्मा की बेंच तलाक के इस मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें महिला की अर्जी मंजूर कर ली गई और उसे तलाक मिल गया। मामला 2015 से कोर्ट में लंबित था, जिसमें आखिर फैसला सुना दिया गया।

दरअसल, 2011 में महिला की शादी भीलवाड़ा के आटूण गांव में हुई थी, जहां घर में शौचालय नहीं था। उसे बाहर शौच के लिए जाने में शर्म महसूस होती थी। उसकी बात को घर के लोग अनुसुना कर रहे थे। हारकर महिला ने कोर्ट का रुख किया। वह पिछले 2 साल से मायके में रह रही थी।

जस्टिस शर्मा ने अपने फ़ैसले में कहा-


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‘ये हमारे लिए कितनी शर्मनाक और दर्दनाक बात है कि घर की महिलाएं रात के अंधेरे में शौच के लिए बाहर जाती हैं। आज हम पान-मसाले, मोबाइल फ़ोन और शराब पर फिजूलखर्ची करते हैं, लेकिन अपने घरों में टॉयलेट नहीं बनवा सकते?”

ऐसी घटना से पता चलता है कि आज भी हमारे देश रूढ़िवादिता है। लोग अपने अड़ियल रवैये और पुरानी सोच के चलते घर-परिवार की भी चिंता नहीं करते। कोर्ट ने अपने इस फैसले से समाज में एक कड़ा संदेश देने की कोशिश की है।

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