ट्रेन ड्राइवरों को नहीं मिलता है टॉयलेट ब्रेक, खटखटाया मानवाधिकार आयोग का दरवाज़ा

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Updated on 18 Jan, 2016 at 2:47 pm

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यह सुनने में आपको अजीब लगे लेकिन यह सच है, भारतीय रेल के ड्राइवरों को 12 घंटे की शिफ्ट के दौरान खाने-पीने का तो छोड़िए, टॉयलेट का भी ब्रेक नहीं मिलता है। इस मुद्दे पर ट्रेन ड्राइवर्स एसोसिएशन ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) से संपर्क साधा है।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश में 19,000 ट्रेनों के लिए 69,000 ड्राइवर्स हैं, जिन्होंने शिकायत की है कि वह बेहद ख़राब परिस्थितियों में काम कर रहे हैं और उन्हें कुछ मिनटों का ब्रेक भी नहीं दिया जाता, ताकि वह कुछ खा सकें या टॉयलेट जा सकें।

इस मामले में इंडियन रेलवे लोको रनिंग मेन्स ऑर्गनाइजेशन (IRLRO) ने NHRC को संपर्क किया है और यह मामला अभी सुनवाई के लिए लंबित है। IRLRO का कहना है कि इस तरह की परिस्थितियां अमानवीय हैं। 12 घंटे की शिफ्ट में उन्हें ऐसी जगह काम करना पड़ रहा है, जहां टॉयलेट की सुविधा ही मुहैया नहीं है और ऐसे में इस तरह की परिस्थितियां शारीरिक और मानसिक तनाव की ओर ले जाती हैं।

Indian Railway driver


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हालांकि रेलवे प्रबंधन का मानना है कि ड्राइवर्स को उनकी शिफ्ट के दौरान ब्रेक देना संभव नहीं है क्योंकि इससे यात्रियों को परेशानी हो सकती है। खान-पान, टॉयलेट जाना यात्रा में अनावश्यक देरी का कारण बन सकता है। दूसरी ट्रेनें प्रभावित न हो, इसलिए भी ड्राइवरों को ट्रेन रोकने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

वहीं IRLRO के कार्यकारी अध्यक्ष एसके पांधी कहते हैंः

“ऐसा केवल भारतीय रेलवे में ही है कि वह अपने ड्राइवर्स को ब्रेक नहीं देते। इन लोको ड्राइवर्स को 12 से 13 घंटे की शिफ्ट में काम करने के बाद मुश्किल से साप्ताहिक छुट्टी मिल पाती है। वहीँ दिल्ली मेट्रो में ड्राइवर्स को हर तीन घंटे में 40 मिनट का ब्रेक लेने की अनुमति है। यहां तक कि एयरलाइन्स में पायलट को नियमित अंतराल में ब्रेक दिया जाता है। लेकिन ट्रेन ड्राइवरों को महज़ एक से दो मिनट का ही ब्रेक दिया जाता है, वह भी तब, जब ट्रेन प्लेटफार्म पर रुकती है।”

पांधी का यह भी कहना है कि 5,000 से 6,000 ड्राइवर्स को अक्सर छोटे-मोटे काम जैसे अधिकारियों के व्यक्तिगत काम करने को भी कहा जाता है।

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