प्रसिद्ध राजा रानी मंदिर में कोई देव प्रतिमा नहीं है, दीवार पर अंकित हैं भगवान शिव और देवी पार्वती

Updated on 20 Oct, 2017 at 9:39 pm

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ओड़िसा की राजधानी भुवनेश्वर में स्थित है प्रसिद्ध राजा रानी मंदिर है। यह मंदिर कलिंग वास्तुकला की बेहतरीन मिसाल है। इसे 11वीं सदी में बनवाया गया था। इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां कोई देव प्रतिमा अलग से स्थापित नहीं की गई है, बल्कि भगवान शिव और देवी पार्वती के के चित्र को दीवाल पर अंकित किया गया है। भगवान शिव के इस रूप को पहले इन्द्रेश्वर के नाम से जाना जाता था।

स्थानीय लोग इसे प्रेम मंदिर के रूप में जानते हैं।

मंदिर की खासियत यह है कि यह एक खास तरह के लाल और पीले पत्थर से बना है, जिसे राजा रानी पत्थर कहते हैं।

कई इतिहासकार इस मंदिर को पुरी के जगन्नाथ मंदिर के समकालीन मानते हैं।



मंदिर के बाहरी सतह पर प्रेम में रत जोड़ों तथा महिलाओं को उत्कीर्ण किया गया है। ये कलाकृतियां बेहद खूबसूरत हैं। ये खुजराहो मंदिर की कलाकृतियों की याद दिलाती हैं। इन कलाकृतियों के निर्माण में महिलाओं की खूबसूरती पर अधिक जोर दिया गया है। बच्चों को दुलारती, आईने में खुद को निहारती, वाद्य यंत्र के साथ, नृत्य करती हुई महिलाओं का चित्रण प्रमुखता से किया गया है। मंदिर के अन्य भाग में भगवान शिव की नटराज प्रतिमा का भी अंकन किया गया है।

इस मंदिर का निर्माण पंचरथ शैली में किया गया है। माना जाता है कि मध्य भारत के कुछ प्रसिदध मंदिरों की वास्तुकला राजा रानी मंदिर से प्रभावित रही होंगी। इन मंदिरों में खजुराहो, तोतेश्वर महादेव मंदिर प्रमुख हैं।

प्रतिवर्ष 18 से 20 जनवरी के बीच मंदिर परिसर में ओडिसा सरकार का पर्यटन विभाग राजारानी संगीत महोत्सव का आयोजन करता है। यह महोत्सव मुख्यतः शास्त्रीय संगीत से संबद्ध है। देश के अलग-अलग हिस्सों से संगीत कलाकार यहां इस महोत्सव में भाग लेने के लिए आते हैं।


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