आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इस पाकिस्तानी शहर में कोई बीफ नहीं खाता

Updated on 15 Oct, 2017 at 11:11 am

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यह किसी से छुपा नहीं है कि पाकिस्तान का तालिबानीकरण हो रहा है। सरकार से लेकर सेना तक यहां कठमुल्लों की संख्या में दिन दूनी रात चौगुनी बढोत्तरी हुई है। अब आप सोच रहे होंगे कि पाकिस्तान में लोग बीफ न खाते हों, ऐसा हो नहीं सकता। हालांकि, आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि पाकिस्तान में एक शहर ऐसा भी है, जहां के लोग बीफ नहीं खाते।

यह शहर बसा है पाकिस्तान के थार रेगिस्तान में और इसका नाम है ‘मीठी’।

पाकिस्तान का मीठी शहर सिन्ध इलाके में है।

यह शहर खूबसूरत है और पाकिस्तान के बड़े शहर कराची से करीब 280 किलोमीटर दूर है। यह पाकिस्तान की उन चुनिंदा जगहों में से है जहां हिंदुओं की संख्या मुसलमानों से ज्यादा है। संभवतः यही वजह है कि इस शहर में बीफ का प्रचलन नहीं है। यह भी कहा जाता है कि यहां सिन्ध की सूफी परंपरा की छाप है। इस वजह से शहर में हिन्दू और मुसलमान के बीच भाई-चारा है और वे सौहार्द्र के साथ रहते हैं।

मीठी शहर की आबादी करीब 87 हजार है और इसमें 70 फीसदी से अधिक हिन्दू हैं।

मीठी शहर में दिवाली।

स्थानीय मुस्लिम लोगों का कहना है कि जब भी कोई धार्मिक त्योहार या सांस्कृतिक आयोजन होता है तो सब मिल-जुलकर हिस्सा लेते हैं। लोग कहते हैं कि जब हिंदू दिवाली मनाते हैं तो हमें भी बुलाते हैं। जब हम ईद मनाते हैं तो उन्हें बुलाते हैं।


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जब कहीं जागरण चल रहा हो, तब इस शहर की मुस्लिम आबादी अपने मस्जिदों पर लाउडस्पीकर का इस्तेमाल नहीं करती। वहीं, दोनों समुदाय अपने त्यौहारों के अवसर पर मिठाइयों और उपहारों का आदान-प्रदान करते हैं।

मीठी शहर का एक मंदिर।

जब पाकिस्तान बना था तब हिन्दुओं की आबादी यहां 20 फीसदी के करीब थी जो अब 2 फीसदी रह गई है। इस्लामिक पाकिस्तान में हिन्दुओं पर अत्याचार को लेकर वैश्विक स्तर पर बहस होती रही है। यहां हिन्दू महिलाओं का धर्म-परिवर्तन कर मुसलमान बनाया जाना आम है।

ऐसे में मीठी शहर कैसे बच गया, यह आश्चर्य का विषय है।

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