कभी सेल्स गर्ल थीं रक्षामंत्री निर्मला सीतारमन, मेहनत के बूते आज इस मुकाम पर

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Updated on 4 Sep, 2017 at 1:04 pm

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मोदी मंत्रिमंडल के विस्तार में नौ नए मंत्रियों ने शपथ ली, जबकि चार मंत्रियों को प्रमोशन दिया गया। इस पूरे विस्तार की सबसे बड़ी खबर रही निर्मला सीतारमन का रक्षा मंत्री बनाया जाना। अभी तक वित्त मंत्री अरुण जेटली रक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे।

निर्मला सीतारमन को प्रमोशन देकर राज्यमंत्री से कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। देश की बाह्य सुरक्षा और युद्ध की स्थिति में नेतृत्व की जिम्मेदारी अब एक महिला के हाथ में है। निर्मला सीतारमन अभी तक वाणिज्य मंत्रालय संभाल रहीं थीं।

आपको बता दे कि इंदिरा गांधी के बाद निर्मला सीतारमन देश की दूसरी महिला रक्षा मंत्री हैं। सीतारमन से पहले प्रधानमंत्री रहते हुए इंदिरा गांधी ने दो बार रक्षा मंत्रालय का जिम्मा अपने हाथों में लिया था। इंदिरा गांधी के पास साल 1975 और 1980-82 के बीच रक्षा मंत्री का अतिरिक्त प्रभार था।

सीतारमन 6 सितंबर से अपना पदभार संभालेंगी।

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भारतीय जनता पार्टी में 2006 में शामिल हुई निर्मला सीतारमन का जन्म तमिलनाडु में हुआ और उनकी ससुराल आंध्र प्रदेश में है। उनके पिता रेलवे में नौकरी करते थे और मां गृहणी थी। शुरू से ही परिवार में अनुशासन और शिक्षा का माहौल रहा। लिहाजा इसका प्रभाव उनके जीवन पर भी रहा।

निर्मला सीतारमन ने अपना ग्रेजुएशन तिरुचिरापल्ली में किया। इसके बाद उन्होंने मास्टर्स की पढ़ाई दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से की।

यहीं नहीं, उन्होंने JNU से इंडो-यूरोपियन टेक्सटाइल ट्रेड विषय से एमफिल भी किया हुआ है।

साल 1986 में पराकला प्रभाकर से उनकी शादी हो गई और वह लंदन शिफ्ट हो गईं। यहां जब उनके पति लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पीएचडी कर रहे थे। तब निर्मला ने खाली बैठने की बजाय नौकरी करने का निर्णय किया। उन्होंने हैबिटेट कंपनी में बतौर सेल्स गर्ल की नौकरी की। यह निर्मला की पहली नौकरी थी। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। फिर वे  प्राइसवॉटरहाउस कूपर्स के साथ सीनियर मैनेजर के तौर पर कार्यरत रहीं।

Nirmala



कॉर्पोरेट क्षेत्र में कई उपलब्धियां हासिल करने के बाद वह 1991 में अपने पति के साथ भारत वापस लौट आईं। भारत लौटने के बाद निर्मला और उनके पति प्रभाकर हैदराबाद बस गए। भारत आकर निर्मला शिक्षा के क्षेत्र में काम करने लगीं। 2003 से 2005 के बीच राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य रहीं।

इसके बाद 2006 में उन्होंने राजनीति के मैदान का रूख किया। अचरज की बात तो ये है कि उनके सास और ससुर दोनों कांग्रेस विधायक रह चुके थे। पति और परिवार का झुकाव कांग्रेस की ओर होने के बावजूद वह 2006 में भाजपा में शामिल हो गईं।

अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत में वह रविशंकर प्रसाद के नेतृत्व में बीजेपी की प्रवक्ता रहीं। साल 2010 में उन्हें बीजेपी का आधिकारिक प्रवक्ता नियुक्त किया गया। उन्होंने कई मुद्दों पर पार्टी का बचाव किया और उनकी योजनाओं और नेतृव की तारीफ की।

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साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। इस चुनाव में उनकी मेहनत का ही फलस्वरूप रहा कि उन्हें मोदी कैबिनेट में शामिल किया गया है।


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