‘निर्भय’ के बारे में ये 13 बातें इसे PAK मिसाइल बाबर से बेहतर साबित करती हैं

Updated on 9 Nov, 2017 at 4:13 pm

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हथियारों का निर्यातक बनने के लिए अभी भारत को कई जगहों पर खुद को मज़बूत बनाने की ज़रूरत है, लेकिन एक क्षेत्र ऐसा है जहां भारत ने खुद को साबित कर दिखाया है। वह क्षेत्र है मिसाइलों का निर्माण। भारत दुनिया में सबसे सक्षम मिसाइल बनाने वाले देशों में से एक है। हमने इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम (आईजीएमडीपी) के तहत दुनिया के कुछ सबसे खतरनाक मिसाइलों का निर्माण किया है, जिसे आज की तारीख में देश की सबसे सफल रक्षा निर्माण परियोजना कहा जा सकता है।

अब भारत के पास पृथ्वी, अग्नि, त्रिशूल, आकाश और नाग श्रृंखला की मिसाइलें हैं। इनमें कई परमाणु हमले के लिए भी सक्षम हैं। साथ ही इनमें से एक इंटरकॉन्टिनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल है। इसके अलावा भारत के पास हवा से हवा, सतह से हवा और जहाज व पनडुब्बी से प्रक्षेपित की जाने वाली मिसाइलें भी हैं। अपने आपको और अधिक शक्तिशाली बनाने की दिशा में हाल ही में भारत ने निर्भय सबसोनिक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। पांचवें प्रयास में इस मिसाइल का परीक्षण सफल हो सका है। इसके पहले के चारों परीक्षण असफल रहे थे।

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भारतीय रक्षा प्रणाली के लिए यह मिसाइल क्यों ज़रूरी है और यह अन्य से किस तरह अलग है। आइए जानते हैं।

निर्भय भारत की पहली परमाणु आयुध युक्त मिसाइल है। इसे पाकिस्तान की बाबर मिसाइल का जवाब माना जाता है। पाकिस्तान ने यह सबसोनिक मिसाइल चीन और अमेरिका की मदद से बनाई है।

बाबर की मारक क्षमता 750 किलोमीटर है, जबकि निर्भय की 1000 से 1500 किलोमीटर। परीक्षण के लिए इसका टारगेट 647 रखा गया था, जिसे इसने पूरा कर लिया।

बाबर और अमेरिका की मिसाइल टॉमहॉक के मुकाबले निर्भय ज़्यादा तेज़ है।

भारत की यह मिसाइल पाकिस्तानी और अमेरिकी मिसाइल से हल्की है, लेकिन उनसे ज़्यादा भार ले जा सकती है।

यह अन्य मिसाइलों से इस मायने में भी अलग है क्योंकि तैनाती के बाद यह एयरक्राफ्ट में भी तब्दील हो सकता है। लॉन्च के बाद निर्भय ने पंख फैलाकर अपने लक्ष्य की ओर उड़ान भरी। इसमें लगा गैस टर्बाइन इंजन इसे एयरक्राफ्ट का लुक देता है.


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यह मिसाइल कई लक्ष्यों के बीच हमला कर सकती है। इसमें मंडराने की क्षमता होने के चलते निर्भय मिसाइल पैंतरेबाजी में प्रदर्शन भी कर सकती है।

निर्भय क्रूज मिसाइल कम ऊंचाई पर उड़ान भर सकती है, जिससे दुश्मन के राडार इसका पता नहीं लगा सकते।

इस मिसाइल का फायर-एंड-फॉरगेट सिस्टम कभी जाम नहीं होता। इस खासियत की वजह से यह खतरनाक हथियारों की सूची में शुमार हो गया है।

पाकिस्तानी मिसाइल में नेविगेशन के लिए विदेशी जीपीएस और सैटेलाइट लगा हुआ है, जबकि निर्भय में भारतीय सैटेलाइट नेविगेशन IRNSS और NAVIC का इस्तेमाल हुआ है। 2013 से 2016 के बीच इसरो ने 7 सैटेलाइट लॉन्च किए थे।

निर्भय को हवा, सतह और पानी कहीं से भी लॉन्च किया जा सकता है। अमेरिकी मिसाइल टॉमहॉक सिर्फ समुद्र से और बाबर सिर्फ हवा से लॉन्च किया जा सकता है।

निर्भय को बनाने के पीछे मुख्य कारण यह है कि भारत 300 किमी से ज़्यादा दूरी वाले मिसाइल नहीं खरीद सकता। दरअसल, भारत ने मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (एमटीसीआर) पर साइन किया हुआ है, इसलिए वो ऐसा नहीं कर सकता, जबकि चीन और पाकिस्तान ने इस पर साइन नहीं किए हैं।

निर्भय मिसाइल बनाने के साथ ही भारत सतह पर हर तरह की मिसाइल- बैलेस्टिक, टैक्टिकल और क्रूज बनाने में माहिर हो गया है। ध्यान रहे कि ब्रह्मोस मिसाइल भारत और रूस का संयुक्त उद्यम है।

इसकी लागत 10 करोड़ रुपए प्रति मिसाइल है और यह ब्रह्मोस की मारक क्षमता को भी कवर करता है.

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