हमें खाना कभी भी ख़राब या व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए, आखिर क्यों?

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Updated on 14 Nov, 2015 at 12:55 am

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भारतीय मान्यताओं में खाद्य पदार्थ या अनाज को देवी लक्ष्मी कहा गया है। मान्यता है कि अनाज या खाना फेंकना नहीं चाहिए। भारतीय समाज में इस चीज की समझ है कि लोग खाना थाली में न छोड़ने की नसीहत देते हैं। आइए जानते हैं कि हमें खाना भी भी व्यर्थ या नष्ट क्यों नहीं करना चाहिए।

1. जुताई (पहला दिन)

खेती के पहले दिन किसान जमीन की ऊपरी परत को जोतकर इसकी मिट्टी को पलट देते हैं। इस प्रक्रिया में नीचे की मिट्टी ऊपर जाती है और प्राकृतिक शक्तियों से प्रभावित होकर भुरभुरी हो जाती है।

2. बुआई (21वां दिन)

खेत की जुताई के बाद करीब 20 दिनों तक मिट्टी को वायु, पाला, वर्षा और सूर्य का प्रकाश मिलता है और इस तरह खेत बुआई के लिए तैयार होता है। इसी दौरान किसान बीजारोपण करते हैं।


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3. सिंचाई (100वां दिन)

100 दिन के करीब फसल की सिंचाई की जाती है। सिंचाई के लिए बारिश का पानी उपयुक्त होता है। बारिश नहीं होने की स्थिति में नलकूप का उपयोग किया जाता है।

4. फसल कटाई (120वां दिन)

करीब 120 दिन के बाद फसल कटाई के लिए तैयार हो जाता है।



5. बालियों की तैयारी(130वां दिन)

फसल की कटाई कर किसान इसे घर ले आते हैं। फसल की बालियों को शेष पौधे से अलग कर लिया जाता है।

6. अनाज (132वां दिन)

अब अनाज पूरी तरह तैयार है। इसको पकाकर खा सकते हैं।

इस तरह आप जान गए होंगे कि जिस अनाज का अपनी रसोई में हम भोजन बनाते हैं, वह एक किसान की करीब 132 दिनों की मेहनत का नतीजा होता है। किसान अनाज के लिए अनवरत कोशिश करता है, कड़ी मेहनत करता है, तब एक निश्चित समय के बाद यह उपलब्ध हो पाता है। भोजन को फेंकने में हमें कुछ समय लगता है, लेकिन इसे उगाने में महीनों लगते हैं। अगर आप अपनी थाली में खाना छोड़ते हैं, तो एक बार सोचिए जरूर।


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