जानिए कौन थे बाबा नीम करौली, जिनके भक्तों में शामिल हैं फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग

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Updated on 13 Oct, 2016 at 6:00 pm

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नीम करौली बाबा का वास्तविक नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा था। उत्तर प्रदेश के अकबरपुर गांव में जन्में बाबा को महाराजजी के नाम से भी पुकारा जाता है।

देश-विदेश में बाबा के हजारों भक्त हैं। इनमें अध्यात्मिक गुरु रामदास, योगी भगवान दास के अलावा ऐपल कंपनी के सीईओ स्टीव जॉब्स और फ़ेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग भी शामिल हैं।

स्टीव जॉब्स बाबा से मिलने खास तौर पर भारत आए थे। आने पर उन्हें पता चला कि बाबा पहले ही समाधि (11 सितंबर 1973) ले चुके हैं। बाद में स्टीव के ही सलाह पर मार्क जुकरबर्ग जब भारत के दौरे पर थे, तब उनका बाबा के आश्रम पर आगमन हुआ था। बाबा के दर्जनों मंदिर देश-विदेश में हैं।

आइए आज जानते हैं कथित चमत्कारिक शक्तियों की वजह से मशहूर नीम करौली बाबा से जुड़े अंजाने तथ्य।

बाबा का जन्म उत्तर प्रदेश के अकबरपुर में हुआ था। उनके पिता का नाम दुर्गा प्रसाद शर्मा था। माना जाता है कि बाबा ने लगभग सन् 1900 के आसपास जन्म लिया था और उनका नाम लक्ष्मी नारायण रखा गया था।

महज 11 वर्ष की उम्र में ही बाबा की शादी करा दी गई थी। बाद में उन्होंने अपने घर को छोड़ दिया था। एक दिन उनके पिताजी ने उन्हें नीम करौली नामक गांव के आसपास देख लिया था। यह नीम करौली ग्रामखिमसपुर, फर्रूखाबाद के पास ही था। बाबा को फिर आगे इसी नाम से जाना जाने लगा। माना जाता है कि लगभग 17 वर्ष की उम्र में उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हो गई थी।

नीम करौली बाबा ने वर्ष 1958 में अपने घर का त्याग किया था। यह वह समय था, जब उनकी बच्ची की आयु 11 साल थी। गृह-त्याग के बाद बाबा पूरे उत्तर भारत में साधू की भांति विचरण करने लगे थे। इस समय के दौरान उन्हें लक्ष्मण दास, हांडी वाला बाबा और तिकोनिया वाला बाबा सहित कई नामों से जाना जाता था। जब उन्होंने गुजरात के ववानिया मोरबी में तप्सया शुरू की, तब वहां उन्हें लोग तलईया बाबा के नाम से जानते थे।

वृंदावन में स्थानीय निवासियों ने बाबा को चमत्कारी बाबा के नाम से संबोधित किया। उनके जीवन काल में दो बड़े आश्रमों का निर्माण हुआ था। पहला वृदांवन में और दूसरा कैंची में, जहां बाबा गर्मियों के महीनों को बिताते थे। उनके समय में 100 से अधिक मंदिरों का निर्माण उनके नाम से हुआ था।


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नीम करौली बाबा हनुमानजी के बहुत बड़े भक्त थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में लगभग 108 हनुमान मंदिर बनवाए थे। वर्तमान में उनके हिंदुस्तान समेत अमरीका के टैक्सास में भी मंदिर हैं।

कैंची आश्रम जहां बाबा अपने जीवन के अंतिम दशक में रहे थे, उसका निर्माण वर्ष 1964 में हुआ था। इसकी खास बात थी कि इस आश्रम में हनुमान जी का भी मंदिर बनावाया गया था।

बाबा को वर्ष 1960 के दशक में अन्तरराष्ट्रीय पहचान मिली। उस समय उनके एक अमेरिकी भक्त बाबा रामदास ने एक किताब लिखी, जिसमें उनका उल्लेख किया गया था। इसके बाद से पश्चिमी देशों से लोग उनके दर्शन तथा आर्शीवाद लेने के लिए आने लगे।

बाबा के भक्तों में एप्पल कंपनी के मालिक स्टीव जॉब्स भी हैं। आज फेसबुक प्रमुख मार्क जुकरबर्ग और हॉलीवुड अभिनेत्री जूलिया रॉबर्ट्स बाबा की भक्त हैं। वर्तमान में बाबा तो समाधि ले चुके हैं, किन्तु कहते हैं कि हनुमान जी का यह मंदिर बिगड़ी तकदीर बना देता है।

बाबा ने अपने शरीर का त्याग 11 सिंतबर, 1973 को किया और भगवान हनुमान जी के सानिध्य में चले गए। बाबा हम सभी के लिए प्रेरणा के स्रोत थे। मान्यता है कि कलियुग में हनुमान जी ही नीम करौली बाबा के नाम अवतार लिए थे।

समय के साथ-साथ इन वर्षों में नैनीताल – अल्मोड़ा सड़क पर नैनीताल से 17 किमी स्थित मंदिर अब लोगों के महत्वपुर्ण तीर्थ बन गया है। 15 जून को जब कैंची धाम का मेला होता है, तब मंदिर में लाखों श्रद्धालु आतें हैं और प्रसाद पाते हैं।

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