मेजर बनी राजपूताना बहू बोली- किसी से कम नहीं हैं गांव की बहू-बेटियां

author image
11:51 pm 24 Oct, 2016

Advertisement

आज की बहू- बेटियां हर क्षेत्र में अपना जौहर दिखा रही हैं। आज की नारी में काफी सकरात्मक बदलाव आ गया है। अब नारी महज रसोई तक सिमटी नहीं है, न ही वह भोग्या है। अब वह पुरुष से कहीं आगे निकल चुकी है। कुछ ऐसा उदाहरण पेश किया है राजस्थान के पाली जिले के खोड़ गांव की बहू नवीना शेखावत ने, जो जिले की पहली महिला मेजर हैं।

नवीना वर्ष 2013 से दो साल तक ऑफिसर ट्रेंनिग एकेडमी में ट्रेंनिग के बाद भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनी थीं। उसके बाद कैप्टन और अब मेजर के पद पर उनका प्रमोशन हुआ है।

देश के सबसे विपरीत परिस्थितियों वाले लेह-लद्दाख अंतरराष्ट्रीय सीमा की रक्षा का भार है नवीना के कंधों पर।

नवीना शुरू से ही आर्मी में जाना चाहती थी। उन्होंने जोधपुर के केएन कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने के बाद डिफेंस शिक्षा में स्नातकोत्तर किया। मेजर के पद पर प्रमोशन से पहले नवीना नक्सल प्रभावित मणिपुर में दो साल तक कैप्टन की पोस्ट पर तैनात रहीं। इस दौरान उन्होंने नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों में बखूबी भागीदारी निभाई। नक्सलवादियों को मुख्यधारा में लाने के लिए वह अपने स्तर पर कई अभियान चला चुकी हैं।

dainikbhaskar

dainikbhaskar


Advertisement

नवीना मेजर होने के साथ साथ राष्ट्रीय स्तर की शूटर भी हैं।

आपको बता दें नवीना राष्ट्रीय स्तर की शूटर भी है। इसके अलावा आप नवीना को आर्मी के कड़े अनुशासन और संस्कारों-परंपराओं का उत्तम तालमेल भी कह सकते हैं। नवीना हाल ही में आयोजित आर्मी की राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में देश के बेहतरीन 10 शूटरों में शामिल थीं। इस उपलब्धि के साथ ही नवीना नेशनल स्तर पर एनसीसी में भी अपना जौहर दिखा चुकी हैं।



नवीना ससुराल में ससुर समेत बड़े बुजुर्गों के सामने घूंघट में ही रहती हैं। उन्हें यहां परंपरागत राजपूती पहनावा ही पसंद है। नवीना सामाजिक संस्कारों और परंपराओं में पूरा भरोसा रखती हैं। ड्यूटी पर जहाँ सेना की यूनिफॉर्म में देश की सुरक्षा के लिए तैनात रहती हैं। वहीं, अपने ससुराल खोड़ आने पर परिवार के संस्कारों और परंपराओं को भी बखूबी निभाती हैं।

नवीना आर्मी के हर कोर्स और प्रतियोगिता में ‘A’ ग्रेड हासिल कर अवल्ल स्थान पर रहीं हैं।

नवीना 26 जनवरी 2015 को अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के मौजूदगी में राजपथ पर हुई परेड में भी शामिल थीं। नवीना का कहना है कि गांव की बहू-बेटियां किसी से कम नहीं। उन्हें भी सपने देखने और आगे बढ़ने का पूरा हक है। काबीलियत में वे किसी से कम नहीं हैं। सिर्फ मौके और मार्गदर्शक की कमी होती है। उन्हें चाहिए कि वे सपने देखें और जिद के साथ पूरा करें।


Advertisement

आपके विचार


  • Advertisement