मंगल पर जा बसेंगे इंसान, नासा करेगा सपनों को साकार

Updated on 4 Jul, 2017 at 1:17 pm

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नासा अगर अपने मुहिम में सफल रहा तो मंगल पर इंसानी बस्ती का सपना साकार हो सकता है। धरती के बाहर मंगल पर जीवन की संभावना पर बड़े ही जोर-शोर से काम चल रहा है।

दरअसल, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा एक छोटा न्यूक्लियर रिऐक्टर विकसित करने में लगा हुआ है, जिससे मंगल पर जीवन बसाने की दिशा में आखिरी तकनीकी बाधा भी खत्म हो जाएगी। मंगल पर पानी मिलने के बाद जीवन के लिए ऊर्जा पैदा करना अहम् मकसद है।


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नासा अपने ‘किलोपावर’ प्रॉजेक्ट के तहत साढ़े 6 फुट ऊंचे रिऐक्टर्स की जांच कर रहा है। नासा इसमें पिछले 3 सालों से लगा हुआ है। रिऐक्टर्स सितंबर से शुरू होने वाले हैं। अगर ये रिर्क्टर्स डिजाइनिंग और प्रदर्शन की जांच में सफल पाए जाते हैं, तो नासा मंगल पर इनका परीक्षण करेगा। 81 करोड़ रुपये से ज्यादा की इस परियोजना को अमेरिका का ऊर्जा विभाग और नासा का ग्लेन रिसर्च सेंटर साथ मिलकर अंजाम दे रहे हैं।

पिछले दिनों नासा पर ये आरोप लगाए गए थे कि वह बच्चों को गुपचुप तरीकों से मंगल पर भेज रहा है। मंगल ग्रह पर हो रहे प्रयोगों के लिए बच्चों की तस्करी की जा रही है। हालांकि, ये आरोप अभी तक सच साबित नहीं हुए हैं।

मंगर पर इंसानी बस्ती बसाने के लिए नासा हर जरूरी काम कर रहा है। मंगल ग्रह पर मानव अभियान भेजने के लिए लगभग 40 किलोवॉट ऊर्जा की जरूरत पड़ती है। यह ऊर्जा धरती पर 8 घंटों की एनर्जी की खपत के बराबर है। इस ऊर्जा की जरूरत वहां ईंधन, हवा और पानी पैदा करने में होगी। वहां इसकी जरूरत इसलिए है कि मंगल पर केवल सौर ऊर्जा के सहारे नहीं रहा जा सकता। धरती को सूर्य से जितनी ऊष्मा मिलती है, उसका केवल एक तिहाई हिस्सा ही मंगल को मिल पाता है।

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