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नारद कमीशन ने पेश की ‘भ्रष्टाचार’ पर ख़ास रिपोर्ट

Updated on 11 July, 2016 at 4:32 pm By

पिछले दिनों देवलोक में ब्रह्मा जी की अध्यक्षता में एक कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। जिसमें प्रमुख वक्ता के तौर पर ब्रह्मलोक के CAG चित्रगुप्त जी ने पृथ्वी, विशेष तौर से भारत भूमि में ‘भ्रष्टाचार’ नाम के ‘महाभयंकर’ दानव के कहर का जिक्र किया।

चित्रगुप्त ने अपने डाटाबेस के आधार पर ‘भ्रष्टाचार’ को कलियुग की सबसे बड़ी विभीषिका करार दिया। इसके तुरंत बाद से ही दानवों और असुरों के आक्रमण से अक्सर परेशान रहने वाले देवराज इंद्र द्वारा पूरे ‘स्वर्ग’ लोक में ऐहतियातन हाई-अलर्ट घोषित कर दिया गया।


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मामले की सही पड़ताल के लिए सीनियर जर्नलिस्ट ‘नारद’ की अध्यक्षता में ‘नारद कमीशन’ को भू-लोक पर भेजा है। खबर मिली है की कमीशन ने 18 चैप्टर्स की फाइनल रिपोर्ट तैयार की है और सबसे बड़ी बात इसे पृथ्वी की मीडिया से साझा करने से मना कर दिया है। परन्तु हमारी टीम इस रिपोर्ट की एक कॉपी प्राप्त करने में सफल रही। रिपोर्ट के 11 फीचर्स कुछ इस तरह हैं।

1. महिषासुर से ज्यादा डेंजर है ‘भ्रष्टाचार’

रिपोर्ट के पहले अध्याय में ही ‘नारद आयोग’ ने इसे महिषासुर से भी खतरनाक माना है। उन्होंने स्टेटिकल ऑब्जरवेशन के बेसिस पर ये बताया है की ये दानव मानवीय त्रुटि से उत्पन्न हुआ है, लेकिन फिर भी मनुष्य इसका भरपूर उपयोग कर रहा है।

2. कुबेर से बड़ी है ‘भ्रष्टाचार’ की अर्थव्यवस्था

आयोग ने भ्रष्टाचार की इकॉनोमी की आकलन करने में मदद के लिए आर्यभट्ट साब को स्वर्ग में धन्यवाद पत्र भी भिजवाया है। यदि आप अंकगणित में उच्च शिक्षित न हुए तो आपके लिए बड़े-बड़े घोटालों में लगने वाले शून्यों की संख्या बता पाना लगभग असंभव है। दिन-प्रतिदिन भ्रष्टाचार के सिपाहियों द्वारा वृहदतम कीर्तिमान रचे जा रहे हैं।

3. भ्रष्टाचार कलयुग में एक युनिवर्सल परिघटना है, मसलन इसे महर्षि कणाद के वैशेषिक दर्शन से जोड़, कण-कण में व्याप्त माना जा सकता है।

4. ग्लोबल मार्केट



आयोग ने भ्रष्टाचार को बहुत बड़ा मार्केट माना है, जिसमें निवेश अपने-अपने सामर्थ्य के अनुसार लगभग हर मानव करता है, लेकिन फिर भी खुद को इससे त्रस्त बताता है। मार्केट लगभग सभी सेक्टर्स में अच्छा खासा व्यवसाय कर रहा है।

5. सेल्फ एडजस्टेबल

रिपोर्ट के आठवें चैप्टर में बताया है कि 2011 में इस सेक्टर में मंदी की लहर आई थी। रामलीला मैदान से भ्रष्टाचार पर काफी हमले किये गये, लेकिन अंतर्विरोधों के कारण भ्रष्टाचार पुनः यथास्थिति को प्राप्त करने में सफल रहा।

6. विशाल नेटवर्क

इस रिपोर्ट में एक विरोधाभास को बहुत प्रमुखता से दर्शाया गया है की इसमें निवेश करने वाला लगभग हर निवेशक इस बाजार को ख़त्म करने के समर्थन में दिख रहा है। इसके नेटवर्क के सामने भ्रष्टाचार निरोधक इकाइयाँ पूरी तरह विफल रही हैं।

7. केवल अर्थ तंत्र ही नहीं बल्कि,धर्मक्षेत्रों में भी इसने अपनी बड़ी गहरी पकड़ बना रखी है। नारद के मुताबिक़ भ्रष्टाचार की सेना के कुछ एजेंट्स देवलोक में भी छिपे हुए हैं।

8. मैट्रिक्स शैली में अटैक की जरूरत


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ब्रह्मा जी के सामने चित्रगुप्त जी ने स्वीकार किया कि स्वयं उन्हें भी कई जगह भ्रष्टाचार से दो चार होना पड़ा। दो-तीन सॉलिड अटैक के कारण घायल भी हो गये। आयोग ने मैट्रिक्स फिल्म के ‘निओ’ की शैली को भ्रष्टाचार से लड़ने में सबसे कारगर माना है। यानी नेटवर्क(टेक्नोलॉजी) में घुसकर भ्रष्टाचार के नेटवर्क को ख़त्म किया जा सकता है।

9. “अन्ना” नाम के एक योद्धा का जिक्र रिपोर्ट में बार-बार हुआ है, जिस पर आरोप लगे की वो अपनों के की वजह से इस लड़ाई को हार गया।

10. रिपोर्ट में राजनीति को एक बैंक की तरह बताया है, जो करप्शन के मार्केट में सुरक्षित निवेश की गति को बनाये रखता है।

11. रिपोर्ट के अंतिम पन्ने में, मफलर पहने और खांसते हुए एक व्यक्ति की फोटो लगी हुई थी, जो भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ते वक़्त ‘अवैध फंडिंग’ नाम के ड्रेकुला से घायल हो गए थे।

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