इस्लामिक स्टेट के आतंकियों ने 3 महीने तक लूटी इस लड़की की अस्मत, अब UN की गुडविल एम्बेसडर

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Updated on 17 Sep, 2016 at 2:19 pm

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दुनिया के सबसे खूंखार आतंकी संगठन ISIS के आतंकियों के चंगुल में करीब तीन महीने तक बलात्कार और प्रताड़नाएं झेलने के बाद वहां से बच निकलने में सफल रही ‘यजीदी’ लड़की नादिया मुराद को संयुक्त राष्ट्र द्वारा सद्भावना राजदूत (गुडविल एंबेसडर) बनाया गया है।

नादिया अब दुनिया को यजीदियों पर हो रहे जुल्म की कहानियां बयां कर रही हैं।

संयुक्त राष्ट्र ने मानव तस्करी के खिलाफ लोगों को जागरूक करने के लिए 21 वर्षीय नादिया का चुनाव 16 सितंबर, 2016 को किया है।

नादिया को एक गैर मुस्लिम यजिदी समुदाय से होने की वजह से यातनाओं का सामना करना पड़ा था। जब नादिया 19 साल की थी, उस समय धर्म के नाम पर लडऩे वाले इस्लामिक स्टेट ने उसकी आंखों के सामने ही उसके पूरे परिवार को गोलियों से छलनी कर दिया। नादिया को जबरन इराक के उत्तरी शहर सिंजर के पास स्थित उनके गांव कोचो से अगस्त 2014 में उठा कर इस्लामिक स्टेट के नियंत्रण वाले मोसुल में ले आया गया।

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वहां आईएस के लड़ाके नादिया को बंदी बना रोज उसके साथ तब तक रेप करते, जब तक वो बेहोश नहीं हो जाती थी। उसे कई बार खरीदा-बेचा गया। नादिया के अनुसार, आईएस के उग्रवादियों ने उसका इतनी बार बलात्कार किया, जिसे वह गिन भी नहीं सकती। लेकिन बाद में वह उनके चंगुल से निकलने में सफल रही। नादिया कहती है-

“मैं शायद सौभाग्यशाली थी। समय बीतने के साथ, मैंने भाग निकलने का रास्ता खोज लिया. जबकि हजारों अन्य ऐसा नहीं कर पाईं। वे अब भी बंधक हैं।”



UN ने घोषणा की है कि नादिया एक सकारात्मक संदेश के साथ तस्करी के अनगिनत पीड़ितों की दुर्दशा के बारे में जागरूकता फैलाएंगी।

UN सिक्युरिटी काउंसिल में उसने अपने ऊपर हुए जुल्मों का जिक्र करते हुए अपील की कि ISIS को जल्द खत्म किया जाए। नादिया ने जब अपने ऊपर हुई प्रताड़नाओं का जिक्र UN सिक्युरिटी काउंसिल में किया, तो वहां बैठे कई लोगों की आंखें नम हो गई।

नादिया ने उन लगभग 3200 यजीदी महिलाओं और लड़कियों की रिहाई का आह्वान किया, जो अब भी आईएस के आतंकियों के चंगूल में कैद हैं- जहां हर दिन उनकी अस्मत के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है ।

नादिया अब ऐसी  महिलाओं और बच्चों को इन्साफ और उनकी जिंदगी में एक नई उम्मीद लाने का कार्य कर रही है, जो जाति या नस्लीय संघर्ष और उत्पीड़न या मानव तस्करी का शिकार हैं।


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