यह है भगवान शिव के मंदिर में छायानुमा आकृति का रहस्य!

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Updated on 17 Mar, 2016 at 11:21 am

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हैदराबाद स्थित 1000 साल पुराना छाया सोमेश्वर मंदिर उस दौर के वास्तुकारों के विज्ञान की बेहतर समझ को दर्शाता है। इस मंदिर में मौजूद स्तम्भों की एक ख़ास बात है। मंदिर में एक जगह ऐसी है, जहां एक स्तम्भ की छायानुमा आकृति भगवान शिव की मूर्ति के ठीक पीछे दिखाई देती है।

इसकी खास बात यह है कि यह छायानुमा आकृति हमेशा दिखाई पड़ती है। वहीं इस मंदिर के किसी भी स्तम्भ के सामने आप खड़े भी हो जाएं, तो भी यह छायानुमा आकृति बनी रहती है।

इसके पीछे छुपे रहस्य को कई सदियों बाद वैज्ञानिकों ने सुलझा लिया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस अद्भुत घटना के पीछे प्रकाश के विवर्तन का वैज्ञानिक सिद्धांत जुड़ा है। इस सिद्धांत के अंतर्गत जब सूर्य की रोशनी यहां मौजूद भगवान शिव की मूर्ति के पास के चार स्तम्भों पर पड़ती है, तो वह एक छायानुमा आकृति ले एक स्तम्भ के रूप में सामने वाली दीवार पर नज़र आती है।

Someshwara Temple

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इस तरह की वास्तुकला से वर्तमान में भी किसी भवन का निर्माण करना किसी चुनौती से कम नहीं है। इस तरह के सिद्धांत का पता 17वीं सदी में चला था। यानी कि इस मंदिर के 700 साल बाद यह सिद्धांत सामने आया था। जो अपने आप में एक बड़ी बात है।

11वीं सदी में जिस किसी ने भी इसका निर्माण किया होगा, उसे प्रकाश विवर्तन के बारे में पता होगा। इस मंदिर में सूर्य का प्रकाश भीतरी कक्ष तक पहुंचते ही, स्तम्भों के पास से दो संकीर्ण मार्गों से विभाजित हो जाता है। सूर्य का प्रकाश जो कक्ष के अंदर आता है, वही स्तम्भ की छायानुमा आकृति को बनाता है।



इटालियन वैज्ञानिक फ्रांसेस्को मारिया ने ही विज्ञान की दुनिया में ‘विवर्तन’ शब्द को परिभाषित किया था। इन्होने ही पहली बार 1960 में विवर्तन की घटना की सटीक विवेचना की थी।

1000 सालों से अपने अस्तित्व को लिए खड़ा यह मंदिर हमारे देश के अतीत की कई घटनाओं की गवाही देता है।


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