मेक्सिको में भूकंप के बाद दिखी रहस्यमयी रोशनी का सच क्या है?

Updated on 25 Sep, 2017 at 4:41 pm

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7 सितंबर को मेक्सिको में जबर्दस्त भूंकप आया, जिसमें 200 से भी ज़्यादा लोग मारे गए और सैंकड़ों इमारतें मिट्टी में मिल गईं थीं।

करीब 32 साल बाद मेक्सिको में ऐसा भयानक भूकंप आया है, जिसने इतनी बड़ी तबाही मचा दी। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 8.1 मापी गई। वैसे तबाही के अलावा इस भूंकप के बाद जो एक और चीज़ लोगों ने देखी वो चौंकाने वाली थी।

लोगों का दावा है कि उन्होंने आसमान में नीली और हरी रोशनी देखी है। लोगों के इन दावों को झूठा ही माना जा रहा था, लेकिन जब कैमरे में ऐसी तस्वीरें कैद हुई तो ये लोगों का भ्रम सच साबित हुआ। भूकंप की तबाही के दौरान स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने नीली और हरी रोशनी दिखी।

एक अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक ये रोशनी यूएफओ की हो सकती है।



इन रहस्यमयी रोशनियों ने यूएफओ की खोज में लगे लोगों को इसकी खोज के लिए उत्साहित कर दिया है। कई लोगों को लगा कि ये रोशनी इलेक्ट्रिसिटी स्टेशन के जलने की वजह से आ रही हैं, लेकिन यह सच नहीं था। इससे पहले की थ्योरी में जब 1965 में जापान के नागोन में भूंकप आया था, तब भी हरे रंग की रोशनी देखी गई और वैज्ञानिकों को संदेह हुआ कि ये पहाड़ों के हिलने/घर्षण से हुआ है। हालांकि, यह बात भी गलत साबित हुई।

भूकंप के बाद रहस्यमयी रोशनी क्यों दिखती है इस सवाल का जवाब 2014 में  रॉबर्ट थियरिल्ट और उनकी टीम ने दिया।

उनके मुताबिक, भूकंप के दौरान 95% भूकंपीय गतिविधि को टेक्टोनिक प्लेट्स और 85% रोशनी के बीच देखा जाता है। जब टेक्टोनिक प्लेटों में दरारें आती हैं- यह कॉन्टिनेंटल रिप्टिंग के रूप में जाना जाता है। इस सिद्धांत के मुताबिक, भूकंप तब होता है जब पृथ्वी की सतह में तनाव होता है और अंत में भूकंप के रास्ते से वह बाहर आता। इस समय के दौरान, चार्ज किए गए आयनों को भी चट्टानों की सतह में ले जाया जाता है जहां वे जमा किए जाते हैं।

ऑक्सीजन आयनों के उच्च घनत्व वाले समूह हवा को एक इलेक्ट्रिक चार्ज देते हैं, जिससे वो चमकदार प्लाज़्मा में बदल जाता है और यही भूकंप के दौरान या बाद में आकाश में रोशनी के रूप में चमकता है।


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