यह है बौनों का गांव; आज तक नहीं सुलझ सका है रहस्य

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Updated on 12 Jul, 2016 at 8:58 pm

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बौनों का गांव। सुनने में भले ही आश्चर्य लगे, लेकिन यह सच है। यह गांव है चीन के शिचुआन प्रान्त में। और इसका नाम है यांग्सी। कहानी कुछ ‘गुलिवर्स ट्रैवेल्स’ सरीखी है। जी हां, इस गांव की खासियत यह है कि यहां की 50 फीसदी से अधिक आबादी बौनी है। इनकी लम्बाई 2 फुट से 3 फुट तक की है।

जनसंख्या में अधिकतर बौनों की वजह से यह गांव प्रसिद्ध हो गया है। हालांकि, अब तक यह रहस्य ही है कि इस गांव के लोग आखिरकार बौने क्यों होते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि प्रति 20,000 इंसान में से एक इंसान बौना होता है। यानि इनका प्रतिशत बहुत कम, लगभग आबादी का .005 होता है। यांग्सी का मामला कुछ अलग ही है।

वर्ष 1911 में मिला था पहला मामला।

माना जाता है कि वर्ष 1911 में इस तरह का मामला पहली बार सामने आया था। वर्ष 1951 में प्रशासन को लोगों के अंग छोटे होने की शिकायतें मिलीं थीं। और वर्ष 1947 में एक अंग्रेज वैज्ञानिक ने भी इसी इलाके में सैकड़ों बौने होने की बात कही थी। वर्ष 1985 की जनगणना में इस तरह के सैकड़ों मामले यहां रिकॉर्ड किए गए। स्थानीय लोग मानते हैं कि यह एक आनुवांशिक बीमारी है। और यही वजह है कि लोग इससे डरकर गांव से पलायन कर रहे हैं, ताकि उनकी आने वाली पीढ़ी इसकी जद में न आए।

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अब भी है रहस्य।

कई दशक के अध्ययन के बावजूद वैज्ञानिक अब तक इस रहस्य को सुलझाने में कामयाब नहीं हो सके कि आखिर सामान्य कद काठी के लोगों का गांव बौनों के गांव में कैसे तब्दील हो गया। इस गांव की मिट्टी, हवा, पानी, अनाज आदि की कई बार जांच हो चुकी है, लेकिन अब तक इसका कुछ खास पता नहीं चल सका है। पहले तो गांव के जमीन में पारा होने की बात कही गई थी, लेकिन इसे अब तक साबित नहीं किया जा सका है।

कहीं जहरीली गैस तो वजह नहीं।

कुछ लोग यह भी मानते हैं कि इस बीमारी की वजह वे जहरीली गैसें हैं, जो जापान ने दशकों पहले चीन में छोड़ी थी। हालांकि यह भी एक तथ्य है कि जापान चीन के इस इलाके में कभी पहुंचा ही नहीं था। ऐसे ही समय-समय पर तमाम दावे किए गए, लेकिन सही जवाब नहीं मिला।

बुरी आत्माओं का प्रभाव।

इस गांव के कुछ लोग यह भी मानते हैं कि इसके पीछे बुरी आत्माओं का प्रभाव है। लोग कहते हैं कि खराब फेंगशुई की वजह से ऐसा हो रहा है।

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