जगन्नाथ मंदिर के ये 10 चमत्कार जानकर हैरत में पड़ जाएंगे आप!

3:08 pm 17 Sep, 2017

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भारत के प्राचीन मंदिर अपने आप में कई रहस्यों को समेटे हुए हैं। उनकी कलाकृति, मूर्तियां, पूजनविधि आदि अनेक चीजें आपको आकर्षित तो करती हैं, चकित भी करती हैं। ऐसे ही उड़ीसा के पुरी में स्थित है भगवान जगन्नाथ मंदिर, जो पुरातन होने के साथ-साथ रहस्यमयी है। इसका निर्माण 10वीं शताब्दी में किया गया जो सप्त पुरियों में से एक है।


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यह मंदिर अपनी भव्यता और अलौकिकता के साथ-साथ मान्यताओं और सिद्धियों के लिए भी जाना जाता है। कहा जाता है कि सच्चे मन से मन्नत मांगने से भगवान् जगन्नाथ इच्छा पूरी करते हैं। यह मंदिर भगवान विष्णु के 8वें अवतार श्रीकृष्ण को समर्पित है, जिसमें वह अपनी बहन और बलराम के साथ विराजमान हैं। पुराणों में इसे धरती का बैकुंठ कहा गया है, जहां भगवान विष्णु ने पुरुषोत्तम नीलमाधव के रूप में अवतार लिया था और वे सबर जनजाति के परम पूज्य देवता बन गए।

इस मंदिर से जुड़े कई रहस्य आज भी लोगों में चर्चा का विषय बनते हैं। आइए एक नजर उन रहस्यों पर डालते हैं।

 1. मंदिर के शीर्ष पर लगा सुदर्शन चक्र आपको सदैव अपने सामने दिखेगा, भले ही आप किसी भी कोण से क्यों न देखें।

2. गुंबद पर लगा ध्वज हमेशा हवा के विपरीत लहराता है। आखिर ऐसा होता क्यों है, यह किसी को नहीं पता।

3. इस ध्वज को प्रतिदिन बदल दिया जाता है। मान्यता है कि अगर किसी दिन यह ध्वज नहीं बदला जा सका तो फिर मंदिर को 18 वर्षों तक बंद रखना होगा। यह परंपरा पिछले 1800 सालों से चली आ रही है।

4. शिखर पर चक्र कैसे लगा इसके बारे में लोगों को कुछ नहीं पता। यह रहस्य है।

5. सिंहद्वार के अंदर आते ही समुद्र की आवाज सुनाई नहीं पड़ती। यह एक अद्भुत अनुभूती है। विशेषज्ञ जानने की कोशिश कर रहे हैं कि ऐसा आखिर क्यों होता है।

6. मंदिर के ऊपर न तो पक्षी दिखते हैं और न ही कोई हवाई जहाज गुजर सकता है। कोई नहीं जानता है कि इसके पीछे क्या कारण है।

7. यह का अन्नभंडार अक्षय पात्र सरीखा है। भले ही कितने भी लोग आ जाएं, यहां भोजन कभी कम नहीं पड़ता।

8. यहां प्रसाद बनाने का विशेष तरीका है। मंदिर में प्रसाद बनाने के लिए सात बर्तन एक-दूसरे के ऊपर रखे जाते हैं। प्रसाद को लकड़ी जलाकर पकाया जाता है। ध्यान देने वाली बात ये है कि सबसे ऊपर के बर्तन का प्रसाद सबसे पहले पकता है।

9. जगन्नाथ मंदिर का डिज़ाइन ऐसा है कि किसी भी समय मुख्य शिख़र की परछाई नहीं बनती।

 10. पुरी में बहती है उल्टी हवा। अमूमन हवा समुद्र से ज़मीन की तरफ़ चलती और शाम को धरती से समुद्र की तरफ़, लेकिन पुरी में इसके ठीक उलट होता है।

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