गलती से मौत की सजा प्राप्त इस व्यक्ति का कहना है कि भारत में मुसलमान अधिक सुरक्षित हैं।

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Updated on 6 Jan, 2016 at 2:14 pm

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इस्लामिक देशों की अपेक्षा भारत मुसलमानों के लिए बेहद सुरक्षित है। यह कहना है कि अब्दुल कय्यूम मन्सूरी का, जिन्हें वर्ष 2002 में अक्षरधाम मंदिर हमला मामले में गिरफ्तार कर लिया गया था और मौत की सजा सुनाई गई थी।

अब्दुल कय्यूम ने 11 साल जेल की चहारदीवारी के अंदर बिताए, एक ऐसे जुर्म के लिए, जो उन्होंने कभी किया ही नहीं। बाद में मई 1014 में वह सुप्रीम कोर्ट में निर्दोष साबित हुए और उन्हें रिहा कर दिया गया।

हाल ही में अपने लिए आयोजित एक सम्मान समारोह में भारत के लिए लिए प्रेम और आदर दिखाते हुए अब्दुल कय्यूम ने कहाः ‘इस देश में रहने वाले कोई भी मुसलमान शर्मिन्दा नहीं है।’


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यह समारोह पिछले रविवार को सर्वोदय युथ वेलफेयर सोसायटी नामक एक संस्था द्वारा आयोजित किया गया था। पिछले 27 साल से यह संस्था प्रतिवर्ष समाज के एक महत्वपूर्ण व्यक्ति को सम्मानित करती रही है।

अब्दुल कय्यूम मन्सूरी कहते हैं:



जब कभी भी जेल की सजा काटकर आदमी बाहर निकलता है तो उसका अतीत जैसे उसका पीछा करता है। मुझे मुसलमानों से अधिक मेरे हिन्दू मित्रों और हिन्दू वकीलों ने मदद की थी।

यही नहीं, अब मन्सूरी की इच्छा है कि वह सर्वधर्म, समभाव के लिए काम करें।

जेल से वापस आने के बाद अब्दुल कय्यूम ने एक किताब लिखी है। इसका नाम है 11 साल जेल में। इस पुस्तक में उन्होंने अपने जेल के अनुभवों को कलमबद्ध किया है। पुस्तक में कहा गया है कि सुरक्षा एजेन्सियों ने उन्हें गोधरा ट्रेन हादसा, अक्षरधाम मंदिर हमला और हरेन पांड्या हत्या मामलों में से किसी एक में अपना जुर्म स्वीकारने के लिए दबाव डाला था।

इतने बुरे अनुभवों से गुजरने के बावजूद मन्सूरी की आस्था भारत में अनवरत है। उनके शब्द कई लोगों के लिए प्रेरणा का काम कर सकते हैं।


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