कश्मीरी मुसलमानों ने की महाशिवरात्रि की पूजा, पंडितों से घाटी में वापस आने की अपील

author image
Updated on 25 Feb, 2017 at 4:34 pm

Advertisement

आमतौर पर माना जाता है कि कश्मीर में मुसलमान नहीं चाहते कि घाटी में पंडितों की वापसी हो, लेकिन शुक्रवार को महाशिवरात्रि के अवसर पर जो कुछ भी हुआ, वह हैरान करने वाला था। इस रिपोर्ट के मुताबिक, कश्मीर के संबल इलाके में महाशिवरात्रि के अवसर पर सैकड़ों स्थानीय मुसलमान न केवल एक मंदिर में एकत्रित हुए, बल्कि महाशिवरात्रि की पूजा-अर्चना भी की। साथ ही इस पूजा के माध्यम से कश्मीरी पंडितों से घाटी में वापस लौटने की अपील भी की।

संबल इलाके में स्थित नंद किशोर मंदिर के बाहर सैकड़ों मुसलमान हाथों में बैनर लेकर कश्मीरी पंडितों एक लिए एकजुट होकर निकले थे। ये लोग अपील कर रहे थे कि यहां से 27 साल पहले पलायन कर गए कश्मीरी पंडित वापस आएं ताकि अगली शिवरात्रि पर हिन्दू और मुसलमान मिलकर शिवरात्रि का त्यौहार मना सकें।

मंदिर में पूजा करने वाले सबसे पहले मुस्लिम थे 42 वर्षीय इम्तियाज हुसैन पैरी। जालीदार टोपी पहले पैरी ने सबसे पहले मंदिर की सफाई की और फिर शिवलिंग पर फूल व फल चढ़ाए। बाद में पैरी ने मीडिया को बताया कि उन्होंने अपने तरीके से भगवान शिव की पूजा की है। वह मुसलमान हैं और उन्हें पूजा के विधि-विधान के बारे में नहीं पता है। हालांकि, मंदिर में विधि-विधान से पूजा हो, इसके लिए नजदीक के इलाके से पंडित बुलाए गए थे।

नंद किशोर मंदिर को नंदराजा मंदिर भी कहते हैं। यह झेलम के किनारे स्थित है। करीब 27 साल पहले इस इलाके में 50-60 पंडित परिवार रहते थे, लेकिन अब इन परिवारों का यहां कोई नहीं रहता।



मंदिर में जब पूजा-अर्चना का दौर चल रहा था, उस वक्त सैकड़ों स्थानीय लोग कश्मीरी पंडितों के पक्ष में बैनर लेकर खड़े दिखे।

इम्तियाज हुसैन पैरी का कहना है कि पिछले 27 सालों में इस मंदिर में पूजा-अर्चना नहीं हुई थी।


Advertisement

आपके विचार


  • Advertisement