इस्लाम में मुस्लिम महिलाओं के नौकरी की इजाजत नहीं, अब देवबंद से जारी हुआ फरमान

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Updated on 3 Apr, 2017 at 10:00 pm

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इस्लाम में जारी तीन तलाक, बहु-विवाह जैसी कुरितियों पर देश भर में बहस छिड़ी हुई है। ऐसे में दारूल उलूम देवबंद के एक वरिष्ठ मौलाना ने महिलाओं पर एक विवादित टिप्पणी की है। तंजीम उलेमा ए हिंद के प्रदेश अध्यक्ष नदीम उल वाजदी का कहना है कि मुस्लिम महिलाओं को इस्लाम में नौकरी की इजाजत नहीं है। उन्हें सरकारी या गैर-सरकारी किसी भी तरह की नौकरी नहीं करनी चाहिए।

इस रिपोर्ट में वाजदी के हवाले से बताया गया है कि घर का खर्च उठाने की जिम्मेदारी मर्द की होती है। महिलाओं का काम बाहर नौकरी करना नहीं, बल्कि घर और बच्चों की देखभाल करना है। वाजदी कहते हैं कि महिलाएं सिर्फ एक शर्त पर नौकरी कर सकती हैं, जब उनके घर में खर्च उठाने वाला कोई मर्द न हो। ऐसी स्थिति में वह चेहरे ढककर सभी काम कर सकती हैं। यह पहली बार नहीं है जब दारूल उलूम देवबंद की तरफ से फिजूल की बयानबाजी की गई हो। देवबंद पहले से तमाम फतवों और बयानों को लेकर बदनाम रहा है।

देवबंद ने फतवा जारी करते हुए कहा था कि तलाक के लिए औरत का मौजूद रहना जरूरी नहीं है और अगर कोई पति चाहे तो मोबाइल फोन से भी अपनी पत्नी को तलाक दे सकता है।

तीन तलाक पर जहां लगातार बहस चल रही हैं, वहीं देवबंद ने मोबाइल फोन से दिए गए तलाक को भी मान्य कर दिया।

इससे पहले देवबंद के फतवों में ‘भारत माता की जय’ के नारे को गैर-इस्लामी बताया गया था।


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