‘मुस्लिम महिलाएं जिम में वर्कआउट कर सकती हैं बशर्ते कि वे मेल ट्रेनर न रखें’

Updated on 13 Oct, 2017 at 5:45 pm

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फतवे का बाजार गरम हो तो मुस्लिम समुदाय के लोग फूंक-फूंक कर चलना मुनासिब समझते हैं। मुस्लिम महिलाओं के बीच ‘वर्कआउट अंडर बुर्का का पैगाम’ फिटनेस के प्रति जागरूकता फैला रही है, तो साथ ही इसे धार्मिक चश्मे से खंगाल लिया गया।

क्या मुस्लिम महिलाएं जिम में जाकर वर्क आउट कर सकती हैं?

इस सवाल पर देवबंद के मदरसा जामिया हुसैनिया के मुफ्ती तारिक कासमी का जवाब था कि मुस्लिम महिलाएं ऐसा कर सकती हैं बशर्ते कि वे कुछ नियमों का पालन करें। मसलन पर्दे में वर्कआउट करें, म्यूजिक न सुनें, मर्द ट्रेनर न रखें इत्यादि।

मुफ्ती के अनुसार औरतों के फिटनेस के लिए इस्लाम में गुंजाइश हो सकती है। महिलाएं जिम जाती हैं तो जरूरी है कि वहां कोई गैर शरीय अमल न होता हो। इस्लामिक कायदों का समुचित ख्याल रखकर महिलाएं जिम जा सकती हैं। शरीर को फिट रखना सभी के लिए जरूरी है।

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मुफ्ती ने स्पष्ट किया कि जब औरतें जिम में मौजूद हों तो वहां मर्द की मौजूदगी नहीं होनी चाहिए। जिम के अन्दर गाना-बजाना भी नहीं होना चाहिए। मुफ्ती ने ये भी कहा कि दो औरतें साथ में जिम करती हों तो एक दूसरे की सतर (जिस्म) को न देखें। औरतें दूसरी औरतों के सामने भी पर्दा करें, शरीर खुला न रखें।



गौरतलब है कि स्वास्थ्य के लिए मुस्लिम महिलाओं में भी जागरूकता आ गई है। पिछले दिनों भोपाल में महिलाएं वर्कआउट अंडर बुर्का का पैगाम देते हुए जिम जाने को बढ़ावा दे रही थीं। भोपाल में 70 लाख की लागत से बने सरकारी जिम की धूम मची है, जिसमें मुस्लिम महिलाओं के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। महिलाओं की सहूलियत के लिए जिम में महिला ट्रेनर को रखा गया है।

याद दिला दें कि मुस्लिम महिलाओं द्वारा बुर्का में क्रिकेट खेलना सुर्ख़ियां बनी थी। अब ‘वर्कआउट अंडर बुर्का’ से साबित हो रहा है कि मुस्लिम महिलाएं बुर्का पहनने के बावजूद किसी भी फील्ड में पीछे नहीं रहना चाहती हैं।


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