मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्डः धार्मिक मामलों में कोर्ट नहीं दे सकता दखल

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Updated on 2 Sep, 2016 at 4:41 pm

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मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने तीन तलाक की प्रथा को जायज ठहराते हुए कहा है कि कोर्ट धार्मिक मामलों में दखल नहीं दे सकता है। इस संबंध में बोर्ड ने सर्वोच्च न्यायालय में हलफनामा दाखिल किया है।

बोर्ड ने हलफनामे में कहा है कि सामाजिक सुधार के नाम पर पर्सनल लॉ को बदला नहीं जा सकता। इसमें तीन तलाक को चुनौती देने की बात को असंवैधानिक बताया गया है।

गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय में तीन तलाक के मामले की सुनवाई चल रही है।

पिछली सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय ने तीन तलाक के मसले को लेकर केंद्र सरकार और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से जवाब मांगा था। कोर्ट में इशरत जहां नाम की महिला ने याचिका देकर ट्रिपल तलाक का विरोध किया है। महिला कहना है कि यह कानून संविधान के खिलाफ है।


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इससे पहले सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर कह चुके हैं कि यह कोर्ट तय करेगा कि अदालत किस हद तक मुस्लिम पर्सनल लॉ में दखल दे सकती है, और क्या उसके कुछ प्रावधानों से नागरिकों को संविधान द्वारा मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है।

सर्वोच्च न्यायालय ने संकेत दिया है कि यदि जरूरी लगा तो इस मामले को बड़ी बेंच को भेजा जा सकता है।

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