माहौल बिगाड़ने वालों को आइना दिखा रहीं चंबल की 4 मुस्लिम बेटियां

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Updated on 12 Apr, 2016 at 11:28 am

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चंबल के बीहड़ों को आज तक सिर्फ बागी और डकैतों के लिए ही जाना जाता है, लेकिन इसी बीहड़ में बसे एक गांव की 4 मुस्लिम बेटियों ने सौहार्द्रता की मिसाल पेश की है, वह काबिले-तारीफ है।

बीहड़ के गोहरा नामक गांव में एक मुस्लिम परिवार की चार बच्चियों ने मजहब की दीवारें तोड़ते हुए देवी मां की भक्ति में अपना तन-मन अर्पित कर दिया है।

मजहब के नाम पर आए दिन माहौल बिगाड़ने वालों को आइना दिखाने वाली ये बेटियां अपनी हिन्दू सहेलियों ज्योति, अनुपम, वंदना, साधना के साथ गांव में देवी माता के स्थान पर पूजा करने जाती हैं। और इसमे सबसे अच्छी बात है कि इसमें इनके परिजनों का पूरा सहयोग मिलता है।

गौहरा गांव में एक प्राचीन देवी माता का स्थान है, जिसमें हिन्दुओं की खास आस्था है। नवरात्र के पहले दिन जब गांव की लड़कियां यहां पूजा-अर्चना करने गई, तो उनके साथ गाव की ही मुस्लिम बेटियां नूर मोहम्मद की पुत्री नफीसा (16), तहसील खां की पुत्री शायना (8), बसरुद्दीन की पुत्री खुशबू (9), जेनुद्दीन की पुत्री महक (10) भी पूजा करने पहुंची। उन्होंने देवी की मूर्ति पर पूजा सामग्री चढ़ाई और हिन्दू सहेलियों की तरह ही पूजा की।


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इन चारों लड़कियों का कहना है कि देवी मां की पूजा करना उन्हें अच्छा लगता हैं। यही नहीं, उन्होंने अपनी हिन्दू सहेलियों से देवी माता के भजन भी सीख लिए हैं, जिसको चारों मिल कर बहुत आस्था से गाती हैं।

ये चारो बेटियां रिश्ते में चचेरी बहने हैं। ये गांव के मुस्लिम समुदाय के बुजुर्ग वशीर खां के परिवार से ताल्लुक रखती हैं। वशीर खां या उनके परिवार ने उन्हें पूजा-अर्चना से कभी नहीं रोका।

वशीर खां कहते हैं कि यहां सालों से हिन्दू-मुस्लिम साथ रहते आए हैं। आज तक हम में कभी अनबन नहीं हुई। फिर हम सभी मिल कर हर त्योहार मनाते हैं। मुस्लिम परिवार की बेटियों का देवी मां की पूजा करना अच्छी बात है। इससे सौहार्द्र का माहौल बनता है।

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