इस्लामिक चरमपंथ से मनोवैज्ञानिक तरीके से लड़ रहा है चीन, निकाला है यह तरीका

Updated on 19 May, 2018 at 10:14 am

Advertisement

चीन तेजी से तरक्की की राह चढ़ता देश है, तो वहीं कई मायनों में इसकी भर्त्सना भी हो रही है। चीन न केवल पड़ोसियों पर आंखें चमकाता है, बल्कि अपने नागरिकों पर ज्यादती से बाज नहीं आता है। खबर यह है कि चीन में मुसलमानों पर अत्यार हो रहे हैं। यह खबर आपको हिलाकर रख सकती है। हालांकि, इसे इस्लामिक चरमपंथ से लड़ने के लिए जरूरी माना जा रहा है।

बताया गया है कि चीन की सरकार इस्लामिक चरमपंथ के खात्मे के लिए सरकार कोई सैन्य अभियान नहीं चला रही है, बल्कि एक अलग ही तरीका खोज निकाला है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन बेहद मनोवैज्ञानिक तरीके से इस्लामिक चरमपंथ से लड़ रहा है।

 

ibtimes.com


Advertisement

दरअसल, चीन मुसलमानों को शिक्षित करने के नाम पर ‘री-एजुकेशनल कैंप’ चला रहा है। हालांकि, इसके पीछे की सच्चाई कुछ और है। वहां से भागे मुसलमानों ने अपना दर्द बयां किया है। कैम्प में रह चुके एक मुस्लिम कायरात समरकंद ने प्रताड़ना की कहानी बताई है। उनका कहना है कि कैम्पों में शिक्षा के नाम पर ब्रेनवाश किया जाता है। साथ ही वहां घटिया खाना दिया जाता है।

 

 

पीड़ितों की मानें तो अच्छे खाने की मांग करने पर सजा के रूप में जबरन सूअर का मांस खिलाया जा रहा है और शराब पिलाई जाती है, जो इस्लाम में हराम है।

 

समरकंद का कहना है कि वह पड़ोसी देश कजाखस्तान चला गया था। इतनी सी गलती होने पर चीन में उसे कड़ी पूछताछ के बाद ‘री-एजुकेशनल कैंप’ में रखा गया। वहां उसे न केवल बेइज्जत किया गया, बल्कि घंटों वामपंथी साहित्य पढ़ने को मजबूर किया जाता था।



 

 

इन कैम्पों में राष्ट्रपति शी जिनपिंग की गौरवगाथा और उनकी लंबी उम्र की कामना करने वाले नारे लगवाए जाते हैं। समरकंद का दावा है कि ऐसे कैम्पों में दुनिया की आंखों में धूल झोंककर कई हजार मुस्लिमों को रखा गया है। चीन के शिनजियांग प्रांत में ही लगभग एक करोड़ 10 लाख मुस्लिम हैं, जबकि देश में इनकी कुल आबादी 2 करोड़ 10 लाख है। मुसलमानों की एक बड़ी आबादी हिरासत में लेकर कैम्पों के हवाले कर दिए गए हैं, जिनमें युवा मुस्लिम अधिक हैं।

 

 

ज्ञात हो कि चीन समय-समय पर मुस्लिम समुदायों पर आरोप लगाते हुए पाबंदियां लगाता है।


Advertisement

आपके विचार


  • Advertisement