दुनिया के सबसे पुराने मंदिरों में एक है बिहार का मुंडेश्वरी मंदिर

Updated on 29 Jul, 2017 at 11:00 am

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बिहार के मुंडेश्वरी मंदिर को दुनिया के सबसे पुराने मंदिरों में एक माना जाता है। शक्ति और शिव को समर्पित यह मंदिर बिहार के कैमूर जिले में 608 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इसे दुनिया का सबसे पुराना मंदिर माना जाता है, जिसमें आज भी पूजा होती है।

कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण दूसरी शताब्दी में हुआ था, लेकिन इसके निर्माण को लेकर कई अलग-अलग धारणाएं हैं। मंदिर में लगे भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण के एक सूचनापट्ट के अनुसार, यह मंदिर 635 ईसवी पूर्व में बना था। मंदिर परिसर में मौजूद एक अन्य शिलालेख से पता चलता है कि यह ऐतिहासिक मंदिर करीब डेढ़ हजार साल पुराना है।

कहा जाता है की इस मंदिर की खोज पहाड़ी के ऊपर गए कुछ गड़रियों ने की थी। शिलालेख के मुताबिक, यह शुरू में वैष्णव मंदिर रहा होगा, जो बाद में शैव मंदिर हो गया। मंदिर में दुर्लभ शिवलिंग के साथ मां मुंडेश्वरी के रूप में देवी दुर्गा का वैष्णवी रूप स्थापित है।


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मान्यताओं के अनुसार चंड व मुंड नामक दैत्यों को मारने के लिए देवी प्रकट हुईं थीं। चंड के मरने पर मुंड इसी पहाड़ी में छिप गया था और यहीं पर माता ने उसका वध किया था। इसीलिए यह मंदिर मुंडेश्वरी माता के नाम से जाना जाता है।

इस मंदिर की एक खासियत सात्विक बलि की परंपरा है। यहां बकरे को देवी के सामने लाया अवश्य जाता है, लेकिन उसकी बलि नहीं दी जाती। बकरे को माता के सामने लाकर पुरोहित मंत्र वाले चावल छिड़कता है, जिससे वह बेहोश हो जाता है। फिर उस बकरे को बाहर छोड़ दिया जाता है।

यहां दर्शन के लिए श्रीलंका से भी श्रद्धालु आते थे। इस बात का प्रमाण मंदिर के रास्तों में पाए गए सिक्के हैं। सिक्कों और यहां पहाड़ी के पत्थरों पर तमिल और सिंहली भाषा में अक्षर लिखे हुए हैं। मंदिर में नवरात्र के समय बहुत भीड़ होती है।

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