मुंबई के ताज होटल को मिला देश का पहला बिल्‍डिंग ट्रेडमार्क

Updated on 20 Jun, 2017 at 1:24 pm

Advertisement

मुंबई का नाम आते ही जहन में ताज होटल की छवि उभर जाती है। अब इसी प्रतिष्ठित होटल को ट्रेडमार्क मिल गया है।

समुद्र किनारे देश की शान के रूप में खड़े 114 साल पुराने ताज महल पैलेस होटल को अब रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क मिल गया है। ट्रेडमार्किंग के बाद अब कोई भी कंपनी बिना परमिशन के ताज महल पैलेस की तस्वीर का कॉमर्सियल यूज नहीं कर सकेगा।

इंडियन होटल्ट कंपनी लिमिटेड (आईएचसीएल) के जनरल काउन्सल राजेन्द्र मिश्र के मुताबिक, ताज होटल की स्पेशलिटी को बचाने के लिए ऐसा किया गया है।

इस बिल्डिंग को रजिस्टर कराने में  सात महीने का वक्त लग गया। इस ट्रेडमार्किंग के बाद अब कोई भी कंपनी बिना इजाजत के ताज महल पैलेस की फोटो का व्यावसायिक इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। होटल के आसपास की कुछ दुकाने, होटल की तस्वीर के साथ फोटो फ्रेम और कफलिंक जैसे सामान बेच रहे हैं।


Advertisement

इंडिया में पहली बार किसी बिल्डिंग को ट्रेडमार्क दिया गया है। इससे पहले न्यूयॉर्क की एम्पायर स्टेट बिल्डिंग, पेरिस का एफिल टॉवर और सिडनी का ओपेरा हाउस को ट्रेडमार्क दिया गया था।

आमतौर पर लोगो, ब्रांड नेम, कलर, नंबर्स और म्यूजिक का ट्रेडमार्क लिया जाता है, लेकिन 1999 में लागू हुए नए ट्रेडमार्क एक्ट के बाद बिल्डिंग्स के डिजाइन का ट्रेडमार्क करवाना आसान हो गया।

दिलचस्प है इसके बनने की कहानी

टाटा ग्रुप के कई होटल देश के अलग-अलग शहरो में हैं। इनमें मुंबई स्थित होटल ताज के निर्माण की कहानी काफी रोचक है। कहा जाता है कि एक बार जब रतन टाटा के पिता जमशेद जी टाटा ब्रिटेन घूमने गए तो वहां मौजूद एक होटल में उन्हें भारतीय होने के कारण रुकने नहीं दिया गया। ऐसे में जमशेद जी टाटा ने ठाना कि वह ऐसे होटलों का निर्माण करेंगे, जिन्हें हिंदुस्तान ही नहीं, पूरी दुनिया के लोग हसरत से देखेंगे।

आपको बता दें कि ताज महल पैलेस होटल को गेटवे ऑफ इंडिया से भी पहले सन 1903 में बनाया गया था। इसने इंडियन नेवी को रास्ता दिखाने के लिए एक ट्रायंगल पॉइंट का काम किया था। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान इसे अस्पताल में तब्दील कर दिया गया था। यह होटल 26/11 आतंकी हमला अपने ऊपर झेल चुका है।

Advertisement

आपके विचार


  • Advertisement