मुंबई की गंदी बस्तियों की शक्ल-सूरत बदल रही है, यह रहा सबूत

Updated on 16 Jan, 2018 at 1:21 pm

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फिल्म ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ तो देखा ही होगा आपने! अगर मुंबई नहीं गए हैं तो इसी फिल्म को देखकर अंदाजा लगा सकते हैं। हालांकि, दुनिया के अलग-अलग देशों के तमाम लोगों को मुंबई के चरित्र के बारे में इसी फिल्म से पता चला था। मुंबई चकाचौंध वाला शहर है। यह अलग बात है कि यहां विशाल बस्तियां इसकी खूबसूरती पर बट्टा ही लगाती रही हैं। हालांकि, अब सूरत बदल रही है।

इन बस्तियों को तेजी से डेंटिंग-पेंटिंग के जरिए चमकाया जा रहा है। जानकर हैरानी होगी कि यह कोई सरकार की ओर से नहीं किया जा रहा, बल्कि ये आम लोग ही हैं जो शहर को खूबसूरत बनाने चले हैं, स्लम बस्तियों को चमकाने चले हैं।

यकीन कीजिए, यह मुंबई की एक बस्ती है!

जी हां! मुंबई का यह स्लम एरिया इटली के एक गांव पोजितानो के समतुल्य माना जा रहा है। घाटकोपर इलाके में स्थित यह इलाका असल्फा स्लम के नाम से जाना जाता है। यह बस्ती पहले इतनी साफ़-सुथरी और रंगीन नहीं हुआ करती थी।


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इस बस्ती को रंगने में ‘चल रंग दे’ नाम के एनजीओ का हाथ है। यह एनजीओ बस्तियों के घरों की दीवारों को खूबसूरत रंगों से सजाने का काम करता है। एनजीओ की हेड देदीप्य रेड्डी ने मुंबई मेट्रो और पेंट बनानेवाली कंपनी स्नोसेम के साथ मिलकर ऐसा करने का फ़ैसला किया। यह संस्था एक वेबसाइट के जरिए स्वयंसेवियों को अपने साथ जोड़ती है। वॉलेंटियर्स के रूप में इस काम को करने के लिए सीनियर सिटिजन तक आगे आए और असल्फा बस्ती की सभी 175 दीवारों को अलग-अलग रंगों में रंग दिया।

ज्ञात हो कि इस नेक कार्य को करने के लिए 750 लोगों ने आर्थिक मदद दी है। लगभग 400 लीटर पेंट की मदद से पूरी की पूरी बस्ती ही रंगीन कर दी। इसमें कलाकारी भी दिखाई गई जो कि आकर्षक बन पड़ी है। अब यह बस्ती विदेशी सैलानियों को भी लुभा रही है। इस परियोजना के सफल होने के बाद अब एनजीओ ‘चल रंग दे’ ने बांद्रा के स्लम को भी खूबसूरत रंगों से सजाने की ठानी है।

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