कसाब को फांसी दिलवाने वाली ये लड़की क्यों कहलाती है ‘कसाब की बेटी’!

Updated on 26 Nov, 2018 at 2:59 pm

Advertisement

26/11 की वो डरावनी रात आखिर कौन भूल सकता है। इस रात ने कई लोगों की चीखें सुनी थीं। इस रात कई बेगुनाहों ने आखिरी सांस ली थी। पुलिस के कई जवान मारे गए थे। इस रात के ज़ख़्म कभी ना भरने वाले ज़ख़्म हैं। इस रात हुआ आतंकी हमला आज तक हर किसी के ज़हन में है। कईयों ने अपनों को खोया, तो कईयों की ज़िंदगी बदल गई। इन्हीं में से एक है 26/11 की ही रात दहशतगर्दों के नापाक मंसूबों का शिकार हुईं देविका रोटावन।

 

 


Advertisement

उस रात ने देविका की पूरी ज़िंदगी को बदलकर रख दिया। देविका वहीं लड़की है जो 26/11आतंकी हमले की सबसे छोटी चश्मदीद गवाह बनकर सामने आई थी। देविका ने इस हमले के आरोपी कसाब को फांसी के फंदे तक पहुंचाया था। लेकिन देविका को ही लोग ‘कसाब की बेटी’ कहकर पुकारते हैं। इस हमले के दौरान देविका करीब 9 साल की थीं। देविका के ज़हन में हमले का दर्द अभी भी ताज़ा है या यूं कहें लोगों ने उस ज़ख़्म को कभी भरने ही नहीं दिया।

 

 



हमले के बाद से देविका को कसाब की बेटी कहा जाने लगा। देविका को स्कूल में दाखिला नहीं मिला। पिता का बिज़नेस भी ठप्प हो गया। कोई उनसे या उनके परिवार से बात नहीं करता। रिश्तेदारों ने भी परिवार से दूरी बना ली है। उन्हें अपना घर-शहर छोड़कर जाना पड़ा। ये सब सिर्फ़ इसलिए क्योंकि सबको लगता है इस परिवार के संपर्क में रहने से उनपर भी आतंकी हमले का खतरा मंडराएगा।

इन 10 सालों में देविका की ज़िंदगी में आए उतार-चढ़ाव के बाद अब देविका IPS ऑफिसर बनकर आतंकियों से बदला लेना चाहती हैं। इस हमले के दर्द को देविका ने खुद बयां किया है। देविका बताती हैं उनके इलाज के दौरान उनका भाई अस्पताल में उनके साथ था। देविका की मरहम पट्टी उनका भाई ही करता था। इस वजह से उनके भाई को भी इंफेक्शन हो गया और वो आज सामान्य जीवन व्यतीत नहीं कर पा रहा है।

 

 

26/11 के दौरान मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनस पर सबसे ज़्यादा लोगों को निशाना बनाया गया था। देविका को भी यहां पर पैर में गोली लगी थी। हमले वाली रात देविका अपने पिता और भाई के साथ पुणे जा रही थी और स्‍टेशन पर अपनी ट्रेन का इंतजार कर रही थीं। प्‍लेटफॉर्म 12 पर मौजूद देविका का भाई जब टॉयलेट गया तभी आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी। देविका के पिता ने उसका हाथ पकड़ा और दोनों भागने लगे। लेकिन तभी देविका के पैर में गोली लग गई। देविका ज़मीन पर गिर गईं और तभी उन्‍होंने अपने सामने कसाब को देखा जो मुस्‍कुरा रहा था। देविका ने बताया  कसाब को इस बात का बिलकुल भी अफसोस नहीं था उसने क्‍या किया है।

जो लड़की आतंकी कसाब को फांसी के तख्ते तक पहुंचाने में अहम गवा बनी, उसके साथ ऐसा सलूख करना बेहद ही शर्मनाक है। जिस लड़की को सम्मान मिलना चाहिए, उसे समाज में तिरस्कार मिल रहा है और उसे ‘कसाब की बेटी’ कहा जा रहा है।


Advertisement

आपके विचार


  • Advertisement